बिहार में अब ऑफलाइन भी होगा जमाबंदी में सुधार

पटना: बिहार में भूमि सर्वेक्षण 2024 के तहत डिजिटाइज्ड जमाबंदी में सुधार को लेकर सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी जिलों के डीएम (जिला मजिस्ट्रेट) को निर्देश जारी किया है कि जमाबंदी में जो त्रुटियां सामने आ रही हैं, उनके समाधान के लिए रैयत (किसान) अब ऑफलाइन आवेदन भी कर सकेंगे। यह कदम तब उठाया गया है जब सरकार ने पाया कि ऑनलाइन माध्यम में गड़बड़ी और बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण रैयतों को परेशानी हो रही है।

ऑफलाइन आवेदन से मिलेगी राहत

बिहार में भूमि सर्वेक्षण और डिजिटाइज्ड जमाबंदी प्रक्रिया के तहत कई गांवों और क्षेत्रों में यह समस्या उत्पन्न हो रही थी कि ऑनलाइन आवेदन में गड़बड़ी हो रही है, या फिर कई रैयत खुद इस प्रक्रिया का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। खासकर गांवों में लोगों को इंटरनेट की सही सुविधा नहीं होने के कारण, उन्हें इस काम के लिए दूसरों को पैसे भी देने पड़ते थे।

सरकार ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए, रैयतों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ऑफलाइन आवेदन की प्रक्रिया को जारी रखने का फैसला लिया है। इससे उन्हें अपनी जमीन से संबंधित सुधार के लिए अब किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे सीधे स्थानीय स्तर पर आवेदन कर सकेंगे।

सरकार का निर्देश और कदम

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव, दीपक कुमार सिंह ने प्रमंडलीय आयुक्तों और सभी जिलों के डीएम को एक पत्र जारी किया है। इस पत्र में उन्होंने यह निर्देश दिया है कि जब तक परिमार्जन प्लस पोर्टल पर ऑनलाइन ऑप्शन पूरी तरह से सुचारू नहीं हो जाता, तब तक रैयत ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह पहल राज्य सरकार की ओर से रैयतों को होने वाली समस्याओं के समाधान के रूप में देखी जा रही है।

अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन माध्यम में आ रही गड़बड़ी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि किसी भी रैयत को अपनी जमाबंदी में सुधार करवाने के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, यह कदम इस बात को सुनिश्चित करता है कि जो लोग तकनीकी कारणों से ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे थे, उन्हें राहत मिले।

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