राज्य सरकार ने इस पदोन्नति और तैनाती को नियमावली के बिना किए जाने पर गहरी नाराजगी जताई है। शासन ने यह महसूस किया कि नियमों के उल्लंघन के कारण यह पदोन्नति और तैनाती पूरी तरह से अवैध है। इस पर शासन ने विशेष सचिव वित्त समीर वर्मा द्वारा एक आदेश जारी किया जिसमें सभी पदोन्नतियों और तैनातियों को निरस्त कर दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक, इन पदोन्नतियों को बिना लेखा परीक्षा संवर्ग नियमावली के कैबिनेट से पारित किए बिना ही मंजूरी दी गई थी। इसके बाद, 16 जनवरी को इन लेखा परीक्षकों को नई तैनाती भी दे दी गई थी। जैसे ही यह मामला शासन तक पहुंचा, तो सरकार ने तत्काल निदेशालय से इसका स्पष्टीकरण मांगा।
दरअसल यह निर्णय सरकार द्वारा नियमों के पालन की महत्वपूर्णता को रेखांकित करता है और यह स्पष्ट करता है कि बिना उचित प्रक्रियाओं के कोई भी प्रशासनिक कार्य नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही निदेशक से इस मामले की मूल पत्रावली तत्काल शासन भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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