महाकुंभ में जाना होगा पैदल, जान लें ट्रैफिक प्लान

न्यूज डेस्क: प्रयागराज, जो संगम की पवित्र भूमि के रूप में जाना जाता है, पर 13 जनवरी 2025 से महाकुंभ का आयोजन शुरू होने जा रहा है। इस धार्मिक महापर्व में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भाग लेने के लिए पहुंचते हैं, और ऐसे में यातायात व्यवस्था का खास ध्यान रखा जाता है। महाकुंभ के दौरान पुलिस ने यातायात के सुचारू संचालन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।

नो व्हीकल जोन की व्यवस्था

महाकुंभ के दौरान सबसे महत्वपूर्ण पहलू होगा "नो व्हीकल जोन" की व्यवस्था। खासकर 29 जनवरी को होने वाले मौनी अमावस्या के स्नान पर पांच दिनों तक शहर और मेला क्षेत्र में यह व्यवस्था लागू रहेगी। 27 जनवरी से लेकर 31 जनवरी तक इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के वाहनों की अनुमति नहीं होगी। दूसरे शहरों से आने वाले वाहनों को शहर के बाहर बनाए गए पार्किंग स्थलों पर रोक दिया जाएगा। इन पार्किंग स्थलों से श्रद्धालु शटल बसों की मदद से मेला क्षेत्र और शहर तक पहुंच सकेंगे।

अन्य प्रमुख स्नान पर्वों पर भी नो व्हीकल जोन

मौनी अमावस्या के अलावा, अन्य प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान भी शहर और मेला क्षेत्र में तीन दिन तक नो व्हीकल जोन रहेगा। इस दौरान वाहन शहर के बाहर बनाए गए पार्किंग स्थलों पर ही खड़े किए जाएंगे और श्रद्धालु शटल बसों के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

शटल बसों का संचालन

शहर में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शटल बसों की व्यवस्था की गई है। एडीजी प्रयागराज जोन, भानु भास्कर के मुताबिक, सिविल लाइंस बस अड्डे को शटल बसों का केंद्र बनाया जाएगा। सभी प्रमुख मार्गों से आने वाली शटल बसें सिविल लाइंस बस अड्डे से होकर गुजरेंगी, और यहां से श्रद्धालु मेला क्षेत्र तक आसानी से पहुंच सकेंगे।

महाकुंभ में पार्किंग सुविधाएं

महाकुंभ के लिए 1900 हेक्टेयर क्षेत्र में कुल 102 छोटे-बड़े पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। इन पार्किंग स्थलों में लगभग 5.5 लाख से ज्यादा वाहन खड़े किए जा सकते हैं। इन पार्किंग स्थलों में सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जैसे कि पेयजल, शौचालय, और स्वास्थ्य सेवाएं।

स्नान घाटों तक पहुंचने की व्यवस्था

महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं को स्नान के लिए अलग-अलग घाटों पर भेजा जाएगा। पार्किंग से स्नान घाटों तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को शटल बसों का इस्तेमाल करना होगा। सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं को स्नान के लिए 1 से 1.5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ेगा, जबकि प्रमुख पर्वों के दिनों में यह दूरी 3 से 4 किलोमीटर हो सकती है।

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