मनमोहन सिंह (2004-2014): मनमोहन सिंह को भारतीय अर्थव्यवस्था के 'आर्किटेक्ट' के रूप में देखा जाता है, खासकर उनकी भूमिका 1991 में भारत के आर्थिक उदारीकरण में महत्वपूर्ण रही। उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत ने तेजी से विकास किया।
कुंजी आंकड़े:
2004-2008: मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल में भारत की आर्थिक वृद्धि दर औसतन 8% से ऊपर रही, और यह अवधि भारत के आर्थिक सुधारों का समय था।
2008-2012: वैश्विक वित्तीय संकट के बावजूद, भारत की अर्थव्यवस्था मंदी से अपेक्षाकृत बची रही, लेकिन 2008 के बाद से वृद्धि दर में गिरावट आई। 2008-2009 में आर्थिक वृद्धि दर 6.7% तक गिर गई, लेकिन इसके बाद 2010-2011 में फिर से बढ़कर 8.5% हो गई।
2012-2014: इस अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर गिरकर लगभग 5% तक पहुँच गई, जो एक चिंता का विषय बनी।
नरेन्द्र मोदी (2014-2024): नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की विकास दर में कुछ उतार-चढ़ाव आए, खासकर 2016 में विमुद्रीकरण और 2017 में जीएसटी के लागू होने के बाद। इसके बावजूद, मोदी सरकार के दौरान कुछ वर्षों में भारत ने उच्च विकास दर भी देखी।
कुंजी आंकड़े:
2014-2018: मोदी सरकार के पहले चार वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था ने तेजी से वृद्धि की। 2015 में GDP वृद्धि दर 7.5% रही, जो दुनिया के प्रमुख देशों के मुकाबले बहुत अच्छी थी। 2016 में विमुद्रीकरण का प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ा, जिससे GDP वृद्धि में कुछ गिरावट आई।
2018-2020: 2019 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर लगभग 4.2% हो गई, जो कि पिछले वर्षों की तुलना में कम थी। इसके बाद कोविड-19 महामारी ने अर्थव्यवस्था को और प्रभावित किया।
2020-2021: कोविड-19 के कारण भारत की GDP में 7.3% की गिरावट आई। हालांकि, 2021-2022 में आर्थिक पुनर्निर्माण के संकेत दिखे और वृद्धि दर 8% के आस-पास रही।
2024-2025: कई आर्थिक रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4% रहने का अनुमान है।

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