सरकार के अनुसार, योजना को शुरू हुए दो वर्ष पूरे होने तक देश में 50 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इससे न केवल बिजली की बचत हो रही है, बल्कि कई परिवार अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय भी कमा रहे हैं।
योजना से क्या मिलते हैं फायदे?
पीएम सूर्य घर योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पात्र उपभोक्ताओं को हर महीने 300 यूनिट तक बिजली की बचत का लाभ मिल सकता है। यदि सोलर सिस्टम पर्याप्त बिजली पैदा करता है, तो मासिक बिजली बिल काफी कम या कई मामलों में शून्य तक हो सकता है। इसके अलावा सरकार सोलर प्लांट लगाने के लिए निर्धारित क्षमता के अनुसार सब्सिडी भी देती है। इससे शुरुआती खर्च कम हो जाता है और आम परिवार भी आसानी से सोलर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
योजना ने बनाया नया रिकॉर्ड
रूफटॉप सोलर लगाने की रफ्तार पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, लाखों नए परिवार इस योजना से जुड़े हैं और एक ही महीने में रिकॉर्ड संख्या में सोलर इंस्टॉलेशन किए गए। इससे यह साफ है कि लोग अब पारंपरिक बिजली पर निर्भर रहने के बजाय सौर ऊर्जा को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार ने लाभार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की सब्सिडी भी जारी की है।
बिजली बेचकर भी हो सकती है कमाई
यदि आपके घर का सोलर सिस्टम आपकी जरूरत से अधिक बिजली पैदा करता है, तो अतिरिक्त बिजली को बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) के माध्यम से ग्रिड में भेजा जा सकता है। इसके बदले उपभोक्ता को निर्धारित नियमों के अनुसार भुगतान मिलता है। यानी यह योजना केवल बिजली बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का भी माध्यम बन रही है।
आसान लोन की सुविधा भी उपलब्ध है
जिन परिवारों के लिए एकमुश्त सोलर सिस्टम लगवाना कठिन है, उनके लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इससे कम लागत में सोलर प्लांट लगवाना आसान हो जाता है और धीरे-धीरे बिजली की बचत से इसकी लागत की भरपाई भी हो सकती है।
पीएम सूर्य घर योजना के लिए आवेदन कैसे करें?
इस योजना का आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जा सकता है। सबसे पहले आधिकारिक पोर्टल पर जाकर मोबाइल नंबर से पंजीकरण करें। ओटीपी सत्यापन के बाद अपनी प्रोफाइल बनाएं और राज्य, जिला तथा अन्य आवश्यक जानकारी भरें। इसके बाद "Apply for Solar Rooftop" विकल्प चुनकर अपना DISCOM और उपभोक्ता नंबर दर्ज करें। आवेदन जमा होने के बाद तकनीकी स्वीकृति मिलने पर पंजीकृत विक्रेता का चयन करें।
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