118 वर्ष पुराने कानून में होगा संशोधन
राज्य सरकार रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आई है। विधानसभा से संबंधित संशोधन विधेयक पारित होने के बाद इसे विधान परिषद में भेजा जाएगा। चूंकि यह केंद्रीय कानून है, इसलिए अंतिम रूप से लागू होने से पहले भारत सरकार की मंजूरी भी आवश्यक होगी। मंजूरी और अधिसूचना जारी होने के बाद नए नियम प्रभावी होंगे।
रजिस्ट्री से पहले होगी दस्तावेजों की जांच
नई व्यवस्था के तहत केवल पहचान पत्र पर्याप्त नहीं होगा। विक्रेता को संपत्ति के स्वामित्व, अधिकार, वैध कब्जे और हस्तांतरण से जुड़े आवश्यक मूल दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे। इन दस्तावेजों की जांच के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यदि आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं या उनमें कोई गंभीर कमी पाई जाती है, तो उप निबंधक संबंधित विक्रय विलेख (सेल डीड) का पंजीकरण करने से मना कर सकेंगे।
फर्जी रजिस्ट्री और विवादित संपत्तियों पर रोक
सरकार के अनुसार कई मामलों में वास्तविक मालिक की जानकारी के बिना अन्य लोग संपत्ति बेचने का प्रयास कर देते हैं। इसके अलावा प्रतिबंधित, कुर्क या सरकारी भूमि की भी अवैध रजिस्ट्री कराने के मामले सामने आते रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों की पहले ही स्तर पर जांच होगी, जिससे धोखाधड़ी और अनावश्यक मुकदमेबाजी में कमी आने की उम्मीद है।
प्रदेश में पहले से लागू है डिजिटल पहचान व्यवस्था
प्रदेश में वर्तमान में रजिस्ट्री के दौरान खरीदार और विक्रेता की पहचान आधार और मोबाइल नंबर पर भेजे जाने वाले ओटीपी के माध्यम से सत्यापित की जाती है। अब इसके साथ स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन भी अनिवार्य होने से पूरी प्रक्रिया पहले से अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बन जाएगी।
प्रदेश में जमीन के दान विलेख के नियमों में भी बदलाव
सरकार ने दान विलेख (गिफ्ट डीड) से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन का प्रस्ताव किया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब पंजीकरण शुल्क का निर्धारण संपत्ति के सर्किल रेट के आधार पर किया जाएगा। इससे सभी मामलों में एक समान नियम लागू होंगे और कम मूल्य दिखाकर शुल्क बचाने की प्रवृत्ति पर रोक लग सकेगी।

0 comments:
Post a Comment