नेहरू की वजह से चीन को मिला वीटो पावर, आज भारत के लिए बना है आफत

न्यूज डेस्क: भारत के हर फैसले में वीटो पावर का इस्तेमाल करने वाला चीन ये सायद भूल गया हैं की भारत के कारण ही उसे सुरक्षा परिषद में वीटो पावर मिला था। बीबीसी की एक रिपोट की मानें तो भारत ने सोवियत रूस के साथ मिलकर चीन को सदस्य बनाने के लिए 25 साल तक बराबर सहयोग दिया था। तब जाकर 1971 में उसे सदस्यता मिल पाई थी। 
वीटो पावर प्राप्त करने वाला चीन अब भारत के लिए ही आफत बनता जा रहा हैं। मिली जानकारी के अनुसार चीन 1964 में उसने परमाणु परीक्षण कर लिया था जबकि भारत ने 1974 में किया था। उन्हीं दिनों UN चार्टर में संशोधन किया गया कि 1967 से पहले जिन्होंने परमाणु परीक्षण कर लिया था उन्हें तो नहीं, बाकी सब को एनपीटी (नॉन प्रॉलिफिरेशन ट्रीटी) पर हस्ताक्षर करने होंगे। 

भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए। भारत को परमाणु शक्ति वाला देश नहीं माना गया जबकि चीन को माना गया। द हिंदू की एक रिपोट की मानें तो सच यह है कि नेहरू की भूलों का परिणाम से चीन को वीटो पावर प्राप्त हुआ। नेहरू ने दोस्ती के लिए अमेरिका द्वारा बढ़ाया गया हाथ नहीं थामा और चीन का समर्थन किया। बरना भारत पचास के दशक में ही सुरक्षा परिषद का सदस्य बन जाता।

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