बता दें की नीतीश सरकार ने पंचायती राज अधिनियम 2006 में संशोधन किया है। जिसमे कहा गया हैं की चुनाव ना होने की स्थिति में परामर्शी समिति को पंचायत के काम कार्य की जिम्मेदारी सोपी जाएगी। इसमें सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर नौकरशाह मौजूद होंगे।
खबर के अनुसार पंचायत कानून में किये गये संशोधन तथा पंचायतों का अधिकार नौकरशाह को दिये जाने को लेकर पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। साथ ही साथ इस कानून को रद्द करने तथा पंचायत जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल को बढ़ाने की मांग की गई हैं।
अधिवक्ता प्रियंका सिंह का कहना है की सरकार पंचायती कानून में संशोधन कर जो प्रावधान लाई है वह संविधान के खिलाफ है। इसे रद्द कर देनी चाहिए। अगर राज्य में समय पर चुनाव नहीं होते हैं तो पंचायत जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाना चाहिए।

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