यूपी में शिक्षकों के लिए सरकार का बड़ा फैसला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षकों के अंत:जनपदीय म्यूचुअल तबादलों के लिए नई नीति जारी कर दी गई है, लेकिन शिक्षकों को इसके लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। तबादला आदेश सर्दियों और गर्मियों की छुट्टियों के दौरान ही जारी हो सकते हैं। अगर प्रक्रिया अभी शुरू भी हो जाए, तो उसमें भी समय लगेगा, और तब तक सर्दियों की छुट्टियां खत्म हो जाएंगी। इससे शिक्षक कम से कम गर्मियों की छुट्टियों तक अपने तबादलों का इंतजार करेंगे।

तबादला नीति की प्रक्रिया

बेसिक शिक्षा परिषद ने 27 दिसंबर को तबादला नीति जारी की थी और कहा था की 10 जनवरी तक शिक्षकों का ब्योरा पोर्टल पर अपलोड कर दें। ब्योरा अपलोड होने के बाद ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे। इसके बाद शिक्षकों के आवेदन का सत्यापन बीएसए को 15 दिनों के भीतर करना होगा, फिर जिला स्तरीय समिति अपना निर्णय लेगी। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन महीने का समय लग सकता है।

तबादला आदेश की समस्या

शासनादेश के अनुसार, तबादला आदेश, नई जगह जॉइनिंग और पुरानी जगह रिलीविंग केवल सर्दियों या गर्मियों की छुट्टियों में ही हो सकते हैं। शासनादेश में यह स्पष्ट नहीं कहा गया है कि प्रक्रिया भी छुट्टियों में ही शुरू होगी। इसका मतलब यह है कि प्रक्रिया पूरे साल में कभी भी शुरू की जा सकती है, लेकिन प्रायः प्रक्रिया छुट्टियों के पास ही शुरू की जाती है। इससे तबादला आदेश अगली छुट्टियों तक टल जाते हैं, और अगर छुट्टियों में भी कोई देरी हो जाए तो शिक्षकों को अगले साल की छुट्टियों तक इंतजार करना पड़ता है। इस प्रकार, यह इंतजार एक से डेढ़ साल तक बढ़ सकता है।

शासनादेश का पालन और अफसरों की देरी

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि शासनादेश के अनुसार साल में दो बार म्यूचुअल तबादले हो सकते हैं, लेकिन अफसरों की देरी के कारण एक तबादले में ही एक से डेढ़ साल का समय लग जाता है। यह देरी शिक्षकों के लिए बहुत ही कष्टदायक होती है, क्योंकि वे अपने परिवार और कामकाजी जीवन को स्थिर करने के लिए स्थानांतरण का इंतजार करते हैं।।

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