मोदी सरकार ने इसरो के वैज्ञानिकों का वेतन क्यों घटाया, पढ़ें एक रिपोट

न्यूज डेस्क: कुछ दिन पहले केंद्र की सत्ता में कार्यरत मोदी सरकार ने इसरो के वैज्ञानिकों का वेतन घटाने का फैसला लिया। जिससे इसरो के वैज्ञानिक नाराज भी दिखाई दिए। आज इसी विषय में जानने की कोशिश करेंगे उन कारणों के बारे में जिन कारणों की वजह से मोदी सरकार ने इसरो के वैज्ञानिकों का वेतन घटाने का फैसला लिया। तो आइये इसके बारे में जानते हैं विस्तार से। 
आपको बता दें की इसरो वैज्ञानिकों के लिए दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि की अनुमति राष्ट्रपति ने दी थी ताकि देश में मौजूद बेहतरीन टैलेंट्स को इसरो वैज्ञानिक बनने का प्रोत्साहन मिले। साथ ही इसरो वैज्ञानिक भी प्रेरित हो सके। ये अतिरिक्त वेतन वृद्धि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1996 में अंतरिक्ष विभाग ने लागू किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा था कि इस वेतन वृद्धि को स्पष्ट तौर पर 'तनख्वाह' माना जाए। 

छठे वेतन आयोग में भी इस वेतन वृद्धि को जारी रखने की सिफारिश की गई थी। साथ ही कहा गया था कि इसका लाभ इसरो वैज्ञानिकों को मिलते रहना चाहिए। 

बता दें की दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि इसलिए लागू किया गया था कि इसरो में आने वाले युवा वैज्ञानिकों को नियुक्ति के समय ही प्रेरणा मिल सके और वे इसरो में लंबे समय तक काम कर सकें। केंद्र सरकार के आदेश में परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम (PRIS) का जिक्र है।  हम यह बताना चाहते हैं कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि और PRIS दोनों ही पूरी तरह से अलग-अलग हैं। एक इंसेंटिव है, जबकि दूसरा तनख्वाह है। दोनों एकदूसरे की पूर्ति किसी भी तरह से नहीं करते। 

सरकारी कर्मचारी की तनख्वाह में किसी भी तरह की कटौती तब तक नहीं की जा सकती, जब तक बेहद गंभीर स्थिति न खड़ी हो जाए। 

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