आपको बता दें की भारत में नई पेंशन स्किम की शुरुआत साल 2014 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के द्वारा की गई हैं, जो अभी तक लागू हैं। हालांकि अभी भी पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ 2004 से पहले नौकरी करने कर्मचारियों को मिल रहा है।
नई और पुरानी पेंशन स्कीम में क्या है अंतर?
1 .पुरानी पेंशन स्कीम में रिटायरमेंट के बाद उस व्यक्ति को जीवनभर आधी रकम मिलती थी। जो की नई पेंशन स्किम में ऐसा नहीं हैं।
2 .पुरानी पेंशन स्कीम में सैलरी की कटौती नहीं होती थी। लेकिन नई पेंशन स्कीम में सैलरी से 10 फीसदी की कटौती होती हैं। जिसे बाद में पेंशन के रूप में दिया जाता हैं।
3 .पुरानी पेंशन स्कीम में पेंशन की राशि सरकारी खजाने से मिलती थी। लेकिन नई पेंशन स्कीम में व्यक्ति का पेंशन शेयर बाजार पर निर्भर होता हैं।
4 .पुरानी पेंशन स्किम में रिटायमेंट के बाद मिलने वाले पेंशन की जानकारी होती थी। लेकिन नई स्किम में रिटायरमेंट के बाद कितनी राशि मिलेगी इसकी पहले से जानकारी नहीं रहती हैं।
5 .पुरानी पेंशन स्कीम में 6 महीने बाद महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी होती है। वहीं नई पेंशन स्कीम में ऐसी उपलब्ध नहीं की गई हैं।
6 .पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के लिए जनरल प्रोविडेंट फंड की भी सुविधा थी, जो की नई पेंशन स्कीम में नहीं है।
7 .पुरानी पेंशन स्किम में सर्विस के दौरान कर्मचारी की मौत होने पर फैमिली पेंशन का प्रावधान था, जबकि नई पेंशन स्किम में सर्विस के दौरान मौत होने पर फैमिली पेंशन मिलती है, लेकिन योजना में जमा पैसे सरकार जब्त कर लेती है।

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