बता दें की इस योजना के तहत बिहार के 23 जिलों के किसान लाभान्वित हो सकते हैं। इन जिलों में भोजपुर, बक्सर, जहानाबाद, कैमूर, लखीसराय, नवादा, सारण, शेखपुरा, सिवान, औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, भागलपुर, गया, खगड़िया, मधुबनी, मुंगेर, नालन्दा, पटना, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर और वैशाली शामिल हैं।
प्याज स्टोरेज हाउस बनाने की लागत और सब्सिडी:
प्याज की भंडारण संरचना का एक मॉडल 50 मीट्रिक टन क्षमता वाला है। इसकी अनुमानित लागत ₹6 लाख तय की गई है। इस पर किसानों को कुल लागत का 75% यानी ₹4 लाख 50 हजार की सब्सिडी दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि किसानों को केवल 25% राशि अपनी जेब से खर्च करनी पड़ेगी, जो कि ₹1 लाख 50 हजार होगी। इस तरह से किसान कम खर्च में अपने लिए प्याज स्टोरेज हाउस यानी प्याज गोदाम बना सकते हैं।
बिहार में प्याज भंडारण की आवश्यकता है अधिक:
कृषि उत्पादन में कई बार देखा जाता है कि किसान जब एक अच्छे मौसम में प्याज उगाते हैं, तो अधिक उत्पादन की वजह से कीमतें गिर जाती हैं। ऐसे में अगर उनके पास प्याज का स्टोर करने की उचित सुविधा हो, तो वे इसे अच्छा भाव मिलने पर बेच सकते हैं। इसके अलावा, भंडारण से प्याज खराब होने की समस्या भी कम हो जाती है और लंबे समय तक ताजे प्याज की आपूर्ति होती रहती है। यह किसानों को अपने उत्पाद को बेहतर मूल्य पर बेचने का मौका देता है।
इस योजना से न केवल किसानों को आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि वे अपनी कृषि पद्धतियों को बेहतर तरीके से व्यवस्थित भी कर सकते हैं। इस पहल से बिहार में कृषि उत्पादों के भंडारण और विक्रय के तरीके में सुधार होगा, जिससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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