इनकम जेनरेट करने में चीन से पीछे भारत: रिपोर्ट

न्यूज डेस्क: भारत और चीन की आर्थिक वृद्धि में फर्क क्यों है, यह सवाल हर वक्त चर्चा में रहता है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, लेकिन इनकम जेनरेट करने के मामले में चीन से पीछे है। इसे समझने के लिए हमें कुछ अहम पहलुओं पर गौर करना होगा।

भारत और चीन की आर्थिक स्थिति

2025 के आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, भारत की जीडीपी में 383 अरब डॉलर की बढ़ोतरी होगी, जबकि चीन की जीडीपी में 1.26 ट्रिलियन डॉलर का इजाफा होने का अनुमान है। यह आंकड़ा खुद में चीन की बड़ी अर्थव्यवस्था और उसकी लंबी अवधि की विकास दर को दर्शाता है। वर्तमान समय में चीन की जीडीपी वर्तमान में $19.53 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि भारत की जीडीपी $4.27 ट्रिलियन डॉलर है। यह अंतर इस बात को साफ करता है कि चीन की अर्थव्यवस्था का आकार भारत से कहीं ज्यादा बड़ा है।

भारत और चीन की जीडीपी का आकार लगभग 1980 के आसपास समान था, लेकिन अब अंतर बढ़ चुका है। 2029 तक, चीन की जीडीपी भारत से लगभग चार गुना अधिक होने का अनुमान है। भारत की जीडीपी उस समय करीब $6.3 ट्रिलियन डॉलर होगी, जबकि चीन की जीडीपी $24.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।

भारत और चीन की आर्थिक वृद्धि।

भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.5% रहने का अनुमान है, जो उच्च दर पर है, लेकिन यदि भारत को 2025 तक अपनी जीडीपी में 1.26 ट्रिलियन डॉलर जोड़ना है, तो उसे डॉलर टर्म में 32% की ग्रोथ प्राप्त करनी होगी। वहीं, चीन की 4.5% ग्रोथ दर इस बात का संकेत है कि चीन अब स्थिर विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है, लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था का आकार इतना बड़ा हो चुका है कि वह अब भी बड़ी राशि जोड़ सकता है।

क्यों है अंतर?

आर्थिक आकार और आधार: सबसे पहली बात यह कि चीन की अर्थव्यवस्था का आकार भारत से कहीं बड़ा है। चीन का आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी विकास, और उद्योगों की संख्या भारत से कहीं अधिक है। चीन ने 1980 के बाद 15 बार 10 फीसदी से अधिक जीडीपी ग्रोथ हासिल की है, जबकि भारत का आर्थिक विकास तेज़ी से बढ़ रहा है लेकिन अभी तक वह चीन की तरह स्थिर और उच्च दर की वृद्धि नहीं देख पाया है।

औद्योगिकीकरण और तकनीकी विकास: चीन ने औद्योगिकीकरण, निर्माण और निर्यात क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति की है। उसका निर्माण क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े उद्योगों में से एक है। इसके मुकाबले भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र पर आधारित है, जो कई मामलों में चीन की तुलना में कम प्रोडक्टिव है।

बड़ी आबादी और संसाधन: चीन की विशाल आबादी के कारण उसे ज्यादा उत्पादकता, मानव संसाधन, और श्रमिक शक्ति मिली है, जिसे उसने अपनी वृद्धि के लिए सही दिशा में इस्तेमाल किया। भारत की आबादी भी बड़ी है, लेकिन यहां शिक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र में कुछ चुनौतियां मौजूद हैं।

निवेश और बुनियादी ढांचा: चीन ने अपने बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने में भारी निवेश किया है। सुपरफास्ट ट्रेनों से लेकर स्मार्ट सिटीज और मजबूत निर्माण क्षेत्र तक, चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। भारत में बुनियादी ढांचे में सुधार की प्रक्रिया धीमी रही है, हालांकि हाल के वर्षों में इस दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।

वैश्विक व्यापार और निर्यात: चीन, दुनिया के सबसे बड़े निर्यातक देशों में से एक है, जबकि भारत का निर्यात क्षेत्र चीन के मुकाबले छोटा है। चीन ने कई सालों तक वैश्विक बाजारों में अपनी छाप छोड़ी है, जबकि भारत ने अपने उत्पादों की वैश्विक पैठ को बढ़ाने में समय लिया है।

0 comments:

Post a Comment