यूपी-बिहार के बीच बनेगा ग्रीनफील्ड फोरलेन हाइवे

न्यूज डेस्क: भारत के बुनियादी ढांचे में सुधार की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदम लगातार देश को आगे बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। हाल ही में, बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच एक नया ग्रीनफील्ड फोरलेन हाइवे निर्माण का प्रस्ताव केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा आगे बढ़ाया गया है। यह परियोजना न केवल दोनों राज्यों के बीच यातायात को बेहतर बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि में भी योगदान देगी।

ग्रीनफील्ड हाइवे का महत्व

ग्रीनफील्ड हाइवे का मतलब है एक ऐसा सड़क मार्ग जिसे पूरी तरह से नए अलाइनमेंट के साथ बनाया जाता है, यानी इसे नए स्थानों से होकर डिजाइन किया जाएगा, न कि किसी पुराने मार्ग को फिर से विकसित करने के रूप में। इस हाइवे के निर्माण के साथ-साथ बेतिया (पश्चिम चंपारण) और कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) के बीच दूरी को कम किया जाएगा, जिससे दोनों राज्यों के बीच यातायात अधिक सुविधाजनक और तेज होगा।

इस हाइवे का कुल लंबाई 29.24 किलोमीटर होगी, और यह पूरी तरह से एक नए ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट पर आधारित होगा। इसका निर्माण उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों राज्यों के बीच बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, परिवहन और पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

निर्माण प्रक्रिया

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए एक मजबूत योजना तैयार की है। पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मूल्यांकन समिति इस महीने बैठक करने वाली है, जिससे परियोजना की शुरुआत की दिशा साफ होगी। इस हाइवे के लिए टेंडर मार्च 2025 में जारी किए जाएंगे, और निर्माण कार्य जून 2025 में शुरू किया जाएगा।

यह हाइवे एनएच संख्या 727 ए.ए के तहत बनेगा, और यह पश्चिम चंपारण (बेतिया) से कुशीनगर (सेवरही) तक फैला होगा। इस परियोजना के तहत मार्ग के निर्माण के अलावा, सुरक्षा सुविधाओं और यातायात व्यवस्था को भी बेहतर किया जाएगा।

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