बता दें की मिलेट, जिसे "चीना" भी कहा जाता है, भारतीय कृषि की पारंपरिक फसल है, जो पोषण और सूखा प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है। इसे एक महत्वपूर्ण खाद्य फसल के रूप में देखा जा रहा है, जो किसानों के आय में वृद्धि और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए लाभकारी साबित हो सकती है।
नालंदा में मिलेट की खेती को बढ़ावा देने के प्रयास:
नालंदा जिले में कृषि विभाग ने मिलेट की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष योजना तैयार की है। इसके तहत, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत, किसानों को नि:शुल्क बीज वितरित किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य मिलेट के उत्पादन में वृद्धि करना और किसानों को इस फसल के लाभ के बारे में जागरूक करना है। यह पहल किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है क्योंकि मिलेट की खेती कम पानी की आवश्यकता होती है और यह सूखा प्रतिरोधी फसल मानी जाती है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार योजना का विवरण:
नालंदा जिले के कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस साल गरम मौसम में लगभग 163 एकड़ क्षेत्र में मिलेट की खेती की जाएगी। प्रत्येक प्रखंड में 27 एकड़ क्षेत्र में मिलेट की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत चयनित किसानों को कुल 9.80 क्विंटल बीज नि:शुल्क प्रदान किए जाएंगे। यह कदम किसानों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो सकता है, क्योंकि बीज की लागत किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण खर्च होती है।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार की इस योजना से किसानों को नई दिशा मिल सकती है। मिलेट की खेती को बढ़ावा देने से न केवल किसानों की आय में सुधार होगा, बल्कि यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है। साथ ही, यह भारतीय कृषि क्षेत्र को एक नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

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