रक्सौल एयरपोर्ट का महत्व
रक्सौल, जो बिहार के पश्चिमी हिस्से में स्थित है, नेपाल की सीमा के नजदीक है। यह स्थान दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्री परिवहन के लिहाज से रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, रक्सौल से हवाई यात्रा की सुविधा न होने के कारण, लोगों को काफी दिक्कत होती हैं। रक्सौल एयरपोर्ट का पुनर्विकास होने से यहां से अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें भी हो सकती हैं, जिससे न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नेपाल और भारत के बीच बेहतर कनेक्टिविटी भी सुनिश्चित होगी।
निर्माण प्रक्रिया
रक्सौल एयरपोर्ट का पुनर्विकास करीब 300 एकड़ भूमि पर किया जाएगा। इस परियोजना में रनवे, टर्मिनल भवन, पार्किंग, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण होगा। अंचल कार्यालय द्वारा स्थल निरीक्षण और भूमि की पैमाइश के बाद अब निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। इसके अलावा, आसपास की बस्ती और ऊंची इमारतों को भी ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट की योजना बनाई जा रही है, ताकि किसी भी तरह की बाधा न हो।
सीएम नीतीश कुमार के आने वाले महीने में भूमि निरीक्षण के लिए रक्सौल एयरपोर्ट का दौरा करने की संभावना है। उनके इस दौरे से परियोजना की गति में और तेज़ी आने की उम्मीद है। यह विकास बिहार सरकार के विकास कार्यक्रमों का हिस्सा है, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
कब होगी उड़ान?
रक्सौल एयरपोर्ट के पुनर्विकास का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन वास्तविक उड़ान संचालन के लिए कुछ समय की आवश्यकता होगी। माना जा रहा है कि अगले वर्षों में यह एयरपोर्ट पूरी तरह से तैयार हो जाएगा और यहां से फ्लाइट्स का संचालन शुरू हो जाएगा। जैसे ही निर्माण कार्य पूरा होगा और एयर ट्रैफिक कंट्रोल प्रणाली स्थापित होगी, विमान कंपनियां यहां उड़ान भरने के लिए तैयार हो जाएंगी।

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