बिहार में पारिवारिक बंटवारे के लिए नई व्यवस्था लागू

पटना। बिहार के रैयतों और जमीन मालिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने पारिवारिक भूमि बंटवारे और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी है। शनिवार से यह प्रणाली बिहार भूमि पोर्टल पर प्रभावी हो गई है, जिसके तहत अब एक ही आवेदन से पूरे परिवार की जमीन की जमाबंदी और दाखिल-खारिज संभव हो सकेगा।

अब नहीं लगाने होंगे अलग-अलग आवेदन

नई व्यवस्था की जानकारी देते हुए उप मुख्यमंत्री सह भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि अब तक पारिवारिक बंटवारे के बाद हर हिस्सेदार को अपने हिस्से की जमीन के लिए अलग-अलग दाखिल-खारिज कराना पड़ता था। इस कारण लोगों को समय, पैसा और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नई प्रणाली से यह परेशानी समाप्त हो जाएगी और पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है।

कम समय में तैयार हुई नई डिजिटल प्रणाली

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल के नेतृत्व में विभागीय टीम ने कम समय में इस नई व्यवस्था को विकसित किया है। इसे बिहार भूमि पोर्टल की दाखिल-खारिज सेवा के अंतर्गत जोड़ा गया है, जिससे आम नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

मौखिक बंटवारे वालों के लिए बड़ा मौका

उप मुख्यमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने पूर्वजों की भूमि का विधिवत बंटवारा कर डिजिटल माध्यम से अपने हिस्से की जमीन की जमाबंदी अपने नाम से अवश्य कराएं। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों का जिक्र किया, जिनके यहां अब तक मौखिक बंटवारे के आधार पर जमीन का उपयोग हो रहा है। नई सुविधा के माध्यम से ऐसे बंटवारे को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराया जा सकता है, जिससे भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सकेगा।

विवाद से वंचित होने की समस्या होगी कम

सरकार के अनुसार, मौखिक बंटवारे के कारण अक्सर पारिवारिक भूमि विवाद खड़े हो जाते हैं। इसके अलावा, जमीन का नाम रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं होने से कई लोग सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ भी नहीं उठा पाते। नई व्यवस्था से इन समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगेगी।

उत्तराधिकार-सह-बंटवारा की भी सुविधा

नई प्रणाली में उत्तराधिकार-सह-बंटवारा की सुविधा भी जोड़ी गई है। इसके तहत किसी पूर्वज की मृत्यु के बाद उनकी जमीन का बंटवारा करते हुए सभी उत्तराधिकारियों के नाम उनके हिस्से की जमीन पर अलग-अलग जमाबंदी एक साथ की जा सकेगी। इससे उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में भी प्रक्रिया सरल और तेज होगी।

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