कृतज्ञता से भविष्य की ओर
यह योगदान आईआईटी कानपुर के प्रति पूर्व छात्रों की गहरी कृतज्ञता और संस्थान के शैक्षणिक, शोध एवं सामाजिक प्रभाव को और मजबूत करने की साझा सोच को दर्शाता है। बैच ऑफ 2000 की यह पहल न केवल संस्थान के विकास में मदद करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसरों के द्वार भी खोलेगी।
किस उद्देश्य के लिए दिया गया दान
पूर्व छात्रों ने यह राशि ‘मिलेनियम स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड सोसाइटी’ (MSTAS) की स्थापना के लिए देने का निर्णय लिया है। इस स्कूल का उद्देश्य तकनीक और समाज के बीच सेतु बनाना, बहुविषयक शोध को बढ़ावा देना और सामाजिक चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार को प्रेरित करना है। सिल्वर जुबली रीयूनियन के दौरान इस घोषणा ने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया।
संस्थान ने बताया ऐतिहासिक क्षण
आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणीद्र अग्रवाल ने इसे संस्थान और पूर्व छात्रों के बीच मजबूत रिश्ते का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग शैक्षणिक और शोध व्यवस्था को नई ऊर्जा देता है और संस्थान को वैश्विक स्तर पर और सशक्त बनाता है।
एल्युमिनाई संस्कृति की मिसाल
डीन ऑफ रिसोर्स एंड एल्युमिनाई प्रो. अमेय करकरे ने इस योगदान को पूर्व छात्रों की सक्रिय भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उनके अनुसार, बैच ऑफ 2000 ने दिखाया है कि संगठित एल्युमिनाई सहयोग कैसे छात्रों, संकाय और समाज के लिए परिवर्तनकारी साबित हो सकता है।
पूर्व छात्रों की भावना
बैच ऑफ 2000 के पूर्व छात्रों ने कहा कि आईआईटी कानपुर ने उन्हें केवल डिग्री ही नहीं दी, बल्कि बड़े सपने देखने और उद्देश्य के साथ काम करने की प्रेरणा दी। यह दान उसी कृतज्ञता का प्रतीक है। वहीं, पूर्व छात्र समन्वयक तमाल दास ने इसे साझा मूल्यों और संस्थान के साथ स्थायी जुड़ाव का प्रमाण बताया।

0 comments:
Post a Comment