भारत-कनाडा की बड़ी यूरेनियम डील: व्यापार में नई रफ्तार

नई दिल्ली। भारत और कनाडा ने ऊर्जा और व्यापार सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। दोनों देशों ने असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति के लिए 2.6 अरब डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई वार्ता के बाद लिया गया।

क्या है यूरेनियम डील का महत्व?

यह समझौता भारत के सिविल न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम के लिए लंबे समय तक ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। भारत अपने ऊर्जा मिश्रण में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है, ताकि स्वच्छ और स्थिर बिजली उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

इस डील से: 

परमाणु संयंत्रों के लिए फ्यूल सप्लाई में स्थिरता आएगी। 

आयात स्रोतों में विविधता बढ़ेगी। 

ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। 

दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) और एडवांस्ड रिएक्टर तकनीक पर भी मिलकर काम करेंगे। यह भविष्य की स्वच्छ और सुरक्षित परमाणु तकनीक के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

CEPA से क्या बदलेगा?

दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति जताई है। 2026 के अंत तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। CEPA का उद्देश्य व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना, टैरिफ बाधाओं को कम करना और नए सेक्टरों में सहयोग बढ़ाना प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2030 तक 50 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने के लिए आर्थिक सहयोग की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाएगा।

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