केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, फोर्टिफाइड चावल का वितरण रोका

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत वितरित होने वाले फोर्टिफाइड चावल का वितरण अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह कदम चावल के लंबे समय तक भंडारण के दौरान पोषक तत्वों के खराब होने की चिंताओं के बीच उठाया गया है।

फोर्टिफाइड चावल क्या है?

फोर्टिफाइड चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे पोषक तत्व मिलाए जाते हैं ताकि कुपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं से निपटा जा सके। इसे 2019 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया था और मार्च 2024 तक पूरे देश में लागू किया गया।

क्यों लिया गया यह निर्णय?

खाद्य मंत्रालय ने इस संदर्भ में आईआईटी खड़गपुर को विशेष अध्ययन सौंपा था। अध्ययन में यह जांचा गया कि विभिन्न मौसम और भंडारण परिस्थितियों में फोर्टिफाइड चावल कितने समय तक अपनी पोषण गुणवत्ता बनाए रखता है। रिपोर्ट में सामने आया कि नमी, तापमान और गोदामों में रखे जाने के तरीके से चावल में मिलाए गए विटामिन, आयरन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व लंबे समय तक प्रभावित हो रहे हैं

भंडारण सबसे बड़ी चुनौती

केंद्रीय पूल में चावल की मात्रा जरूरत से बहुत अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, केंद्र में लगभग 674 लाख मीट्रिक टन चावल उपलब्ध है, जबकि सालाना आवश्यकता केवल 372 लाख मीट्रिक टन है। इसके कारण चावल को गोदामों में 2-3 साल तक रखा जाता है। इतने लंबे समय तक भंडारित चावल में पोषक तत्व कमजोर पड़ जाते हैं, जिससे फोर्टिफाइड चावल का मूल उद्देश्य अधूरा रह जाता है।

आम जनता पर इसका असर

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस कदम से राशन कार्ड धारकों को मिलने वाले चावल की मात्रा में कोई कमी नहीं होगी। बस अब यह चावल फोर्टिफाइड (पोषित) नहीं होगा। यह बदलाव PDS, आंगनवाड़ी (ICDS) और स्कूलों में चल रही मिड-डे मील (PM POSHAN) योजनाओं पर लागू होगा। राज्यों को भी छूट दी गई है कि वे खरीफ सीजन 2025-26 के लिए अपनी सुविधा के अनुसार फोर्टिफाइड या सामान्य चावल वितरित कर सकते हैं।

आगे क्या होगा सरकार का कदम?

खाद्य मंत्रालय ने कहा है कि यह रोक स्थायी नहीं है। सरकार अब ऐसी तकनीक या सिस्टम पर काम कर रही है जिससे चावल में पोषक तत्व लंबे समय तक सुरक्षित रहें। जैसे ही कोई प्रभावी तरीका विकसित होगा, फोर्टिफाइड चावल का वितरण फिर से शुरू किया जाएगा। इस कदम से यह साफ है कि सरकार पोषण सुरक्षा और गुणवत्ता दोनों पर ध्यान दे रही है, ताकि लाभार्थियों को सुरक्षित और पौष्टिक अनाज मिले।

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