बिहार में जमीन के दलालों पर होगा एक्शन, FIR के निर्देश

पटना। बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाने और भू-माफिया पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने राजस्व तंत्र को जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि अंचल कार्यालयों में दलालों और बिचौलियों की भूमिका किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान जबरन कब्जे और भू-माफिया से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद प्रशासन ने समीक्षा बैठक कर कार्रवाई की रूपरेखा तय की। बैठक में सभी अंचल अधिकारियों, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं और अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि राजस्व कार्यालयों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

हर अंचल में जारी होगा हेल्पलाइन नंबर

दलालों की सक्रियता पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक अंचल कार्यालय में एक आधिकारिक दूरभाष नंबर जारी किया जाएगा। आम लोग इस नंबर पर दलालों, मुंशियों या अन्य अनियमितताओं की शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा, कार्यालय परिसरों में हाई-एंड सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।

भू-माफिया पर प्राथमिकी के निर्देश

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि भू-माफिया की पहचान कर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए। अधिकारियों को क्षेत्र भ्रमण के दौरान दलालों और मुंशियों की पहचान कर धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसे आरोपों में कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। शहरी अंचलों में विशेष निगरानी की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अनुमंडल पदाधिकारियों को राजस्व कार्यालयों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

समयबद्ध निष्पादन पर जोर

जिलाधिकारी ने कहा कि दाखिल-खारिज, परिमार्जन, नापी और अतिक्रमण से जुड़े मामलों का समय पर निष्पादन नहीं होने से ही दलालों की भूमिका बढ़ती है। ऐसे में सभी लंबित मामलों का तय समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। राजस्व पदाधिकारियों को भूमि विवादों की गंभीरता का सूक्ष्म आकलन कर योजनाबद्ध तरीके से समाधान निकालने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी जमीन की होगी निगरानी

सरकारी भूमि का अद्यतन ब्योरा तैयार रखने और कल्याणकारी योजनाओं के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया है। अपर समाहर्ता को इन कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी गई है। जिला प्रशासन की इस पहल को राजस्व व्यवस्था में सुधार और आम नागरिकों को दलालों से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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