नया नियम क्या है?
पहले तक बॉन्ड को आठ साल तक रखने पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता था, चाहे बॉन्ड सीधे सरकार से लिया गया हो या सेकेंडरी मार्केट से। नए नियम के मुताबिक, टैक्स-फ्री मैच्योरिटी का लाभ केवल उन निवेशकों को मिलेगा जिन्होंने बॉन्ड सीधे RBI से खरीदा हो। यानी 1 अप्रैल 2026 के बाद सेकेंडरी मार्केट या किसी व्यक्ति से उपहार में प्राप्त बॉन्ड पर मैच्योरिटी पर टैक्स देना होगा।
निवेशकों पर असर
मान लीजिए कोई निवेशक एक्सचेंज से ₹7,000 में बॉन्ड खरीदता है और मैच्योरिटी पर यह ₹11,000 का हो जाता है। पहले पूरा ₹4,000 मुनाफा टैक्स-फ्री होता था। अब इस पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा, यानी ₹500 टैक्स देना होगा।
दो तरह के निवेशक
प्राइमरी निवेशक: सीधे RBI से बॉन्ड खरीदने वाले निवेशक, जिन्होंने मैच्योरिटी पर टैक्स-फ्री रिटर्न पाने का अधिकार रखा है।
सेकेंडरी मार्केट निवेशक: एक्सचेंज या किसी से खरीदे बॉन्ड पर मैच्योरिटी पर टैक्स देना होगा, जबकि ब्याज 2.5% रहेगा।
रणनीति बदल सकती है
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से सेकेंडरी मार्केट की लिक्विडिटी प्रभावित हो सकती है। अब निवेशकों को रियायती दरों पर बॉन्ड खरीदकर टैक्स-फ्री लाभ लेने की योजना कारगर नहीं रहेगी।

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