वर्तमान स्थिति
इस परियोजना के लिए अब तक लगभग 40 फीसदी जमीन खरीद की जा चुकी है। पहले चरण में सुपौल जिले में गाद हटाने, पुरानी नहरों के हेड रेगुलेटर और साइफन को पुनर्निर्मित करने का काम चल रहा है। दूसरे चरण के लिए बाकी 60 फीसदी जमीन जुटाने की प्रक्रिया जारी है। पूरे प्रोजेक्ट पर अनुमानित 6,282 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें से 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत दे रही है।
सीमांचल के किसानों के लिए राहत
इस महाअभियान का सबसे बड़ा लाभ अररिया, पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिलों के किसानों को मिलेगा। बाढ़ के दौरान कोसी नदी में अतिरिक्त पानी को नहर के माध्यम से मेची नदी में भेजा जाएगा। इससे लगभग 2.14 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी। कोसी मुख्य नहर की लंबाई वर्तमान में 41 किमी है, जिसे बढ़ाकर 117 किमी किया जाएगा ताकि पानी किशनगंज के अंतिम छोर तक पहुंच सके।
18 प्रखंडों की खेती को नया जीवन
इस परियोजना से कुल 18 प्रखंडों के किसानों को सीधे लाभ मिलेगा। अररिया के फारबिसगंज, जोकीहाट और पलासी से लेकर पूर्णिया के बायसी और अमौर, तथा कटिहार के मनिहारी और कदवा तक नहरों का पानी पहुंचेगा। इससे न सिर्फ खरीफ और रबी की फसलों को बढ़िया सिंचाई मिलेगी, बल्कि कोसी नदी की हर साल होने वाली बाढ़ से होने वाली नुकसान में भी काफी कमी आएगी।
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