लापरवाही बर्दाश्त नहीं, बिहार में कर्मचारियों पर भारी जुर्माना

पटना। बिहार में सरकारी सेवाओं को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011 अब सख्ती के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सेवाओं में देरी या लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही कारण है कि शिथिलता बरतने वाले कर्मियों पर अब तक 2.37 करोड़ 58 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया जा चुका है।

इस पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन द्वारा की जा रही है। आईटी आधारित ट्रैकिंग सिस्टम के कारण प्रत्येक आवेदन की स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जिससे जवाबदेही तय करना आसान हुआ है।

99 प्रतिशत से अधिक सेवाएं समय पर

आंकड़े बताते हैं कि 15 अगस्त 2011 से जनवरी 2026 के पहले सप्ताह तक 51 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें लगभग 99.5 प्रतिशत मामलों का निष्पादन किया गया। केवल सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़ी सेवाओं के लिए ही 40 करोड़ से अधिक आवेदन आए और उनमें से 99.70 प्रतिशत का निपटारा किया गया।

जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज मामलों में भी बड़ी संख्या में आवेदन आए। हालांकि इनका निष्पादन प्रतिशत लगभग 95 प्रतिशत रहा, जो अन्य सेवाओं की तुलना में थोड़ा कम है, फिर भी यह प्रशासनिक दृष्टि से उल्लेखनीय उपलब्धि है।

बिचौलियों पर भी कार्रवाई

डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बावजूद कुछ स्थानों पर बिचौलियों की सक्रियता सामने आई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार अब तक 355 बिचौलियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि सरकार केवल कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि भ्रष्ट तंत्र को भी समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

ऑनलाइन प्रणाली से पारदर्शिता

करीब 90 प्रतिशत आवेदन अब ऑनलाइन माध्यम से आ रहे हैं। इससे न केवल प्रक्रिया तेज हुई है, बल्कि लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिली है। आवेदन की ट्रैकिंग, समयसीमा की निगरानी और दंडात्मक प्रावधानों ने सेवा वितरण को अधिक जवाबदेह बनाया है।

0 comments:

Post a Comment