आपको बता दें की यह फैक्ट्री Assembly, Test और Packaging (ATMP) यूनिट के रूप में काम करेगी, और DRAM तथा NAND मेमोरी चिप्स तैयार करेगी, जो मोबाइल, लैपटॉप, डेटा सेंटर और AI जैसी नई तकनीकों में उपयोग होंगे।
बड़ा निवेश और तकनीकी क्षमता
इस प्रोजेक्ट में करीब ₹22,500 करोड़ का निवेश किया गया है। यह भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत मंजूर पहला बड़ा प्रोजेक्ट है। सरकार लगातार इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए नई नीतियां और वित्तीय समर्थन प्रदान कर रही है, जिससे भारत वैश्विक चिप सप्लाई में अपनी पहचान बना सके।
अत्याधुनिक सुविधाएँ
प्लांट में लगभग 5 लाख वर्ग फीट का क्लीनरूम है, जो विश्व स्तर के मानकों के अनुसार निर्मित किया गया है। क्लीनरूम में धूल और गंदगी से मुक्त वातावरण होता है, जिससे चिप्स की गुणवत्ता उच्चतम स्तर की रहती है।
वैश्विक अवसर
AI और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए, भारत अब ग्लोबल चिप मार्केट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर सकेगा। इसके साथ ही विदेशी कंपनियों के लिए निवेश का आकर्षक मौका भी पैदा होगा।
साणंद का माइक्रोन प्लांट केवल एक फैक्ट्री नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कदम बढ़ाने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।

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