बिहार में बिछेंगी 1000 किमी नई रेललाइन, इन जिलों को खुशखबरी

पटना। बिहार की अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन की धड़कन माने जाने वाले रेल नेटवर्क में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2031 तक राज्य में लगभग 1000 किलोमीटर नई रेललाइन बिछाने का लक्ष्य तय किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 30 बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम प्रस्तावित है, जिनमें 10 नई रेललाइनें और 20 महत्वपूर्ण रेल खंडों का दोहरीकरण शामिल है।

डीडीयू–पटना–झाझा सेक्शन पर बड़ी तैयारी

सबसे अहम परियोजनाओं में से एक डीडीयू-पटना-झाझा रेल खंड पर तीसरी और चौथी लाइन बिछाने की योजना है। यह रूट पहले से ही अत्यधिक व्यस्त है, जहां एक्सप्रेस और मालगाड़ियों का दबाव बना रहता है। अतिरिक्त लाइनों के निर्माण से ट्रेनों की लेटलतीफी कम होगी और यात्री व माल ढुलाई दोनों के लिए अलग-अलग ट्रैक उपलब्ध हो सकेंगे। पटना के आसपास यातायात दबाव कम करने के लिए फुलवारी-पाटलिपुत्र जंक्शन रेल खंड के बीच दोहरीकरण को भी प्राथमिकता दी गई है। इससे राजधानी में ट्रेनों की आवाजाही सुचारु होगी और आउटर पर लंबा इंतजार कम होगा।

नई रेललाइनें जोड़ेंगी नए इलाके

राज्य के कई ऐसे क्षेत्र जो अब तक रेल कनेक्टिविटी से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए थे, उन्हें इस योजना के तहत जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित नई लाइनों में औरंगाबाद-बिहटा रेललाइन, ललितग्राम-वीरपुर रेललाइन और सकरी-फारबिसगंज रेललाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। ये लाइनें सीमावर्ती और औद्योगिक क्षेत्रों को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ेंगी, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। गंगा नदी पर फतुहा-बिदुपुर गंगा रेल पुल परियोजना उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क को मजबूत करेगी। इसके पूरा होने से माल परिवहन और आवागमन दोनों में तेजी आएगी।

दोहरीकरण से बढ़ेगी रफ्तार

राज्य के कई व्यस्त रेलखंडों पर दोहरीकरण का कार्य प्रगति पर है। समस्तीपुर-दरभंगा रेलखंड, किऊल-गया रेलखंड और बरौनी-कटिहार रेलखंड जैसे मार्गों पर अतिरिक्त लाइन बिछने से ट्रेनों की औसत गति में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। अनुमान है कि इन सुधारों के बाद ट्रेनों की स्पीड में करीब 30 प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है।

2031 तक ‘हाई-टेक’ नेटवर्क

रेलवे बोर्ड द्वारा सर्वेक्षण के लिए बजट जारी किया जा चुका है और आने वाले वित्तीय वर्षों में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के बाद जमीनी काम तेज होने की उम्मीद है। यदि निर्धारित समयसीमा में परियोजनाएं पूरी होती हैं, तो 2031 तक बिहार का रेल नेटवर्क अधिक आधुनिक, तेज और तकनीकी रूप से उन्नत रूप में सामने आएगा।

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