योजना का उद्देश्य उन श्रमिकों को बुढ़ापे में नियमित आय उपलब्ध कराना है, जिनके पास किसी संगठित पेंशन व्यवस्था का लाभ नहीं है। यह योजना 15 फरवरी 2019 से लागू है। सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियानों के जरिए श्रमिकों से इस योजना से जुड़ने की अपील भी करती है।
स्वैच्छिक और अंशदायी व्यवस्था
यह एक स्वैच्छिक एवं अंशदायी पेंशन योजना है। इसमें श्रमिक को अपनी आयु के अनुसार हर महीने 55 रुपये से 200 रुपये तक का अंशदान करना होता है। खास बात यह है कि जितनी राशि श्रमिक जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके पेंशन खाते में जमा करती है।
इस प्रकार, संयुक्त अंशदान से भविष्य के लिए पेंशन कोष तैयार होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई श्रमिक 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ता है तो उसे 55 रुपये मासिक जमा करने होंगे। 25 वर्ष की आयु में यह राशि 80 रुपये, 30 वर्ष में 105 रुपये और 40 वर्ष में 200 रुपये प्रतिमाह निर्धारित है।
कौन कर सकता है आवेदन
योजना का लाभ असंगठित क्षेत्र के कामगारों को दिया जाता है। इसमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, खेतिहर श्रमिक, मोची, धोबी और ईंट-भट्ठा मजदूर जैसे कई वर्ग शामिल हैं। आवेदन के लिए आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम हो। आवेदक आयकर दाता नहीं होना चाहिए और वह ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी अन्य सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सदस्य भी न हो।
पारिवारिक पेंशन का भी प्रावधान
योजना में सामाजिक सुरक्षा का दायरा केवल श्रमिक तक सीमित नहीं है। यदि पेंशन प्राप्त करते समय लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है तो उसके जीवनसाथी को 1,500 रुपये प्रतिमाह पारिवारिक पेंशन दी जाती है। यह राशि मूल पेंशन का 50 प्रतिशत होती है।
इस योजना के लिए नामांकन प्रक्रिया
योजना से जुड़ने के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता (या जन-धन खाता) और मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है। पात्र श्रमिक कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से पंजीकरण करा सकते हैं। असंगठित क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन सामाजिक सुरक्षा के मामले में यह वर्ग अक्सर पीछे रह जाता है। ऐसे में यह पेंशन योजना श्रमिकों को वृद्धावस्था में सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।

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