सैलरी बढ़ोतरी का संभावित गणित
पिछले वेतन आयोगों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दूसरे से सातवें वेतन आयोग तक औसत वेतन वृद्धि लगभग 27 प्रतिशत रही है। हालांकि 7वां वेतन आयोग में कुल बढ़ोतरी करीब 14.27 प्रतिशत के आसपास रही थी। वर्तमान में महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत स्वीकृत है और अनुमान है कि 1 जनवरी 2026 तक यह 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यदि इसी आधार को मानें और सरकार लगभग 18 प्रतिशत की वेतन वृद्धि पर सहमत होती है, तो कुल वेतन संशोधन सीमित दायरे में रह सकता है।
फिटमेंट फैक्टर: असली खेल यहीं
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है जिससे मौजूदा बेसिक वेतन को गुणा कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। इसकी गणना मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करती है: उस समय लागू महंगाई भत्ता (DA) और वेतन में प्रस्तावित कुल वृद्धि। यदि जनवरी 2026 तक DA 60 प्रतिशत के आसपास रहता है और कुल वेतन वृद्धि लगभग 18 प्रतिशत तय होती है, तो फिटमेंट फैक्टर 1.90 से 1.92 के बीच रहने की संभावना बनती है।
इसका अर्थ है कि कर्मचारियों की वर्तमान बेसिक सैलरी को लगभग 1.90 से गुणा कर नई सैलरी निर्धारित की जा सकती है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है, तो 1.90 के फिटमेंट फैक्टर से नई बेसिक लगभग 57,000 रुपये के आसपास होगी (अन्य भत्ते अलग से जोड़े जाएंगे)।
लागू कब होगा नया वेतनमान?
सरकार की योजना के अनुसार नया वेतनमान 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा। हालांकि आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने और उसे लागू होने में समय लग सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सिफारिशें तैयार करने में 15 से 18 महीने का समय लग सकता है। संभावना है कि अंतिम रिपोर्ट से पहले एक अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाए।
यदि अंतिम निर्णय 2026 के अंत या 2027 में होता है, तब भी कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से एरियर का भुगतान किया जाएगा। यानी देरी होने पर भी आर्थिक लाभ पिछली तिथि से मिलेगा।

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