CGHS भत्ता बढ़ने की मांग
वर्तमान में जिन शहरों में CGHS पैनल अस्पताल नहीं हैं, वहां कर्मचारियों को मासिक 1,000 रुपये का स्वास्थ्य भत्ता दिया जाता है। लेकिन कर्मचारियों के संगठनों ने इसे बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह करने की मांग उठाई है। NC-JCM की 25 फरवरी 2026 की बैठक में यह मुद्दा प्रमुख रूप से सामने आया।
CGHS क्यों है अहम?
CGHS योजना सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को कैशलेस इलाज, ओपीडी परामर्श, दवाइयां और डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान करती है। हाल के वर्षों में निजी अस्पतालों के पैकेज रेट और सुपर-स्पेशलिटी इलाज की लागत में तेजी से वृद्धि हुई है। इसी वजह से 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन और भत्तों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
संभावित सुधार क्या हो सकते हैं?
विशेषज्ञों का कहना है कि नई सिफारिशों में कई सुधार हो सकते हैं: पैनल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना और पैकेज रेट समय-समय पर अपडेट करना। CGHS लाभ का दायरा बढ़ाना और कर्मचारियों के परिवार को अतिरिक्त सुरक्षा देना। ऑनलाइन अपॉइंटमेंट और ई-रिफरल सिस्टम को और सरल और तेज़ बनाना। बुजुर्ग पेंशनरों के लिए क्रॉनिक बीमारियों, होम-केयर और टेलीमेडिसिन सुविधाओं का विस्तार। प्रशासनिक सुधार और टेक्नोलॉजी अपग्रेड के जरिए योजना को और अधिक प्रभावी बनाना।
8वें वेतन आयोग का टाइमलाइन
8वें वेतन आयोग का गठन पिछले साल नवंबर में हुआ था। फरवरी 2026 में आयोग ने अपनी वेबसाइट लॉन्च की, जहां हितधारकों से 18 प्रश्नों पर प्रतिक्रिया मांगी गई। आयोग की रिपोर्ट आने में लगभग 18 से 20 महीने का समय लगेगा, जिसके बाद इन सिफारिशों को लागू किया जाएगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी है यह बदलाव
जानकारों का कहना है कि महंगाई और निजी अस्पतालों की बढ़ती दरों के कारण CGHS स्कीम को अधिक प्रभावी बनाना जरूरी हो गया है। यह सुधार न केवल कर्मचारियों को वित्तीय राहत देगा बल्कि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा भी उपलब्ध कराएगा। हालांकि अभी ये सिर्फ अनुमान हैं।

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