चीन तेजी से बढ़ा रहा परमाणु ताकत, अमेरिका को टेंशन, भारत अलर्ट!

नई दिल्ली। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक संतुलन तेजी से बदल रहा है। हाल के वर्षों में चीन ने अपनी परमाणु-संचालित पनडुब्बी क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में चीन ने न केवल अधिक पनडुब्बियां तैयार कीं, बल्कि उन्हें सेवा में शामिल करने की गति भी तेज रखी। इस घटनाक्रम ने अमेरिका की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ाया है, वहीं भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति गंभीर मानी जा रही है।

क्या कहती है रिपोर्ट?

लंदन स्थित थिंक टैंक International Institute for Strategic Studies की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच चीन ने 10 परमाणु-संचालित पनडुब्बियां लॉन्च कीं, जबकि अमेरिका इस अवधि में 7 ही तैयार कर सका। कुल टन भार के हिसाब से भी चीन आगे बताया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि People's Liberation Army Navy ने अपने परमाणु बेड़े में बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों और युद्धक (अटैक) पनडुब्बियों दोनों को शामिल किया है। हालांकि सक्रिय सेवा में मौजूद कुल पनडुब्बियों की संख्या में अमेरिका अभी भी आगे है।

दोनों देशों की मौजूदा स्थिति

2025 की शुरुआत तक चीन के पास 12 सक्रिय परमाणु-संचालित पनडुब्बियां बताई गई हैं, जिनमें 6 बैलिस्टिक मिसाइल और 6 गाइडेड या अटैक श्रेणी की हैं। इसके अलावा चीन के पास बड़ी संख्या में पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां भी हैं। दूसरी ओर, अमेरिका के पास कुल 65 परमाणु पनडुब्बियां हैं, जिनमें 14 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां शामिल हैं। अमेरिका पारंपरिक पनडुब्बियों का उपयोग नहीं करता और पूरी तरह परमाणु-संचालित बेड़े पर निर्भर है।

वैश्विक नौसैनिक संतुलन पर असर

ब्रिटिश प्रसारक BBC की एक रिपोर्ट के अनुसार, युद्धपोतों की कुल संख्या के मामले में चीनी नौसेना दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बन चुकी है। जहाजों की संख्या और उत्पादन क्षमता में तेजी से हो रही बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि चीन समुद्री शक्ति को अपनी रणनीतिक प्राथमिकता बना चुका है।

भारत के लिए क्या मायने?

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए यह घटनाक्रम अहम है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी पहले से ही चर्चा में रही है। ऐसे में परमाणु-संचालित पनडुब्बियों की संख्या और क्षमता में इजाफा क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

जानकार मानते हैं कि आने वाले वर्षों में समुद्री सुरक्षा, निगरानी क्षमता और पनडुब्बी रोधी प्रणालियों पर भारत को और अधिक ध्यान देना पड़ सकता है। चीन की बढ़ती नौसैनिक और परमाणु ताकत ने वैश्विक शक्ति संतुलन को नए दौर में पहुंचा दिया है। अमेरिका जहां अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है, वहीं एशिया के अन्य देश भी बदलते हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

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