न्यूज डेस्क: जब से भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया है तब से कोर्ट में इसकी सुनबाई चल रही हैं। आपको बता दें की उच्चतम न्यायालय में अनुच्छेद 370 को हटाने के सरकार के फैसले के खिलाफ गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 मामले को बड़ी बेंच को सौंपने को चुनौती दी जाए या नहीं इस पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बताया कि कैसे जम्मू और कश्मीर का भारतीय संघ में प्रवेश हुआ और यह अपरिवर्तनीय है। वेणुगोपाल ने कहा कि मैं यह दिखाना चाहता हूं कि जम्मू-कश्मीर की संप्रभुता वास्तव में अस्थायी थी। हम राज्यों के संघ हैं।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट रूप से कहा था कि अनुच्छेद-370 का मुद्दा फिलहाल सात सदस्यीय बड़ी सांविधानिक पीठ को नहीं भेजा जाएगा। पांच सदस्यीय सांविधानिक पीठ ने कहा था कि जब तक याचिकाकर्ताओं की तरफ से अनुच्छेद-370 से जुड़े शीर्ष अदालत के दोनों फैसलों (1959 का प्रेमनाथ कौल बनाम जम्मू-कश्मीर और 1970 का संपत प्रकाश बनाम जम्मू-कश्मीर) के बीच कोई सीधा टकराव साबित नहीं किया जाता, वह इस मुद्दे को वरिष्ठ पीठ को नहीं भेजेगी। बता दें कि दोनों ही फैसले पांच सदस्यीय सांविधानिक पीठ ने ही सुनाए थे।
अनुच्छेद 370 को पिछले साल 2019 में केंद्र सरकार ने हटा दिया जिसके बाद पूरा विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर हो गया। आपको बता दें कि मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर को जम्मू कश्मीर और लद्दाख, दो केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया। अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी गई जो खारिज हो गई है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर बड़ा फैसला दिया है जिसके बारे में आगे बताने वाले हैं।
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली संविधान पीठ ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के केंद्र के फैसले की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजे जाने से इनकार कर दिया है।

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