यूपी में 63 छोटे शहरों का मास्टर प्लान होगा तैयार

लखनऊ: केंद्र सरकार ने अमृत-दो योजना के तहत उत्तर प्रदेश के 63 शहरों के लिए मास्टर प्लान तैयार करने की स्वीकृति दी है। इस कदम से प्रदेश के शहरी विकास में एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण चुनौती भी सामने आई है। इन 63 शहरों में से 32 शहरों की आबादी मानक के अनरूप नहीं है, क्योंकि ये सभी नगर पंचायतें हैं और इनकी आबादी 50 हजार से कम है, जो मास्टर प्लान तैयार करने के लिए आवश्यक न्यूनतम आबादी मानक से कम है।

आबादी की वृद्धि के लिए सीमा विस्तार का विचार

केंद्र सरकार की योजना के तहत, इन नगर पंचायतों की आबादी को मानक के अनुरूप लाने के लिए राज्य के नगर विकास विभाग को इनकी सीमा का विस्तार करने का सुझाव दिया गया है। राज्य सरकार इस मामले में जल्द ही कदम उठा सकती है और इन शहरों की आबादी को 50 हजार से ऊपर करने के लिए सीमा विस्तार की दिशा में विचार कर सकती है।

योजना के तहत इन शहरों का मास्टर प्लान 2041 के लिए तैयार किया जाएगा, जो भविष्य में इन शहरों के विकास की दिशा को तय करेगा। इस मास्टर प्लान में बुनियादी ढांचे, सड़क निर्माण, जल आपूर्ति, सीवेज व्यवस्था, हरित क्षेत्र और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास की योजना बनाई जाएगी, ताकि इन शहरों को 2041 तक समृद्ध और संरचित रूप से विकसित किया जा सके।

अमृत-एक योजना का अनुभव और भविष्य की दिशा

यहां उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने पहले अमृत-एक योजना के तहत 59 शहरों का मास्टर प्लान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को धन मुहैया कराया था। इन 59 शहरों का मास्टर प्लान 2031 तक के लिए तैयार किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य शहरों में बुनियादी सुविधाओं का सुधार करना और उन्हें विकास की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करना था।

अब अमृत-दो योजना के तहत 63 और शहरों का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जो 2041 के लिए होगा। इस तरह की योजनाओं से उत्तर प्रदेश के शहरों के शहरीकरण को योजनाबद्ध तरीके से किया जा सकेगा और उन शहरों की विकास दर को नियंत्रित किया जा सकेगा, जो अभी तक अनियंत्रित शहरीकरण का सामना कर रहे हैं।

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