भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच हथियारों की रेस

न्यूज डेस्क: दक्षिण चीन सागर के बाद अब हिंद महासागर में भी शक्ति की तकरार बढ़ती जा रही है। क्षेत्रीय सुरक्षा, शक्ति संतुलन और रक्षा तकनीकी उन्नति के लिहाज से यह इलाका अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के बीच इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य प्रयासों और हथियारों की रेस ने वैश्विक ताकतों का ध्यान आकर्षित किया है। 

भारतीय नौसेना की ताकत

भारतीय नौसेना ने अपनी ताकत को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें परमाणु पनडुब्बी का विस्तार भी शामिल है। वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास दो परमाणु पनडुब्बियां हैं - आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात। इसके अलावा, आईएनएस अरिदमन नामक तीसरी परमाणु पनडुब्बी का परीक्षण पिछले तीन साल से चल रहा है, और इसे इस साल के अंत तक भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। 

इस कदम से भारतीय नौसेना को अपनी समुद्री शक्ति को बढ़ाने में मदद मिलेगी और हिंद महासागर में सामरिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, भारतीय नौसेना हाल ही में 6 कलावरी श्रेणी की परंपरागत पनडुब्बियां भी शामिल कर चुकी है, और अब फ्रांस से 3 और कलावरी श्रेणी की पनडुब्बियां खरीदने की योजना बना रही है।

पाकिस्तान की नौसेना 

पाकिस्तान भी अपनी नौसेना को आधुनिक बनाने में तेजी से कदम उठा रहा है। पाकिस्तान की नौसेना को चीन और तुर्की से सहायता मिल रही है, जिसके चलते वह अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है। चीन से पाकिस्तान 8 हंगोर क्लास की परमाणु पनडुब्बियां प्राप्त कर रहा है, जो एआईपी (एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन) तकनीक से लैस होंगी। इस तकनीक से पनडुब्बियां पानी के भीतर अधिक समय तक रह सकती हैं, जिससे पाकिस्तान को अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, पाकिस्तान की नौसेना चीन की मदद से 30 अत्याधुनिक युद्धपोत भी शामिल करने जा रही है।

चीन की नौसेना की बढ़ती ताकत

चीन, जो इस समय दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बनने का दावा करता है, अपनी सबमरीन ताकत को लगातार बढ़ा रहा है। चीन की नौसेना के पास वर्तमान में 6 परमाणु पनडुब्बियां, 6 अटैक परमाणु पनडुब्बियां और 48 डीजल पनडुब्बियां हैं, जो एआईपी तकनीक से लैस हैं। चीन अपनी पुरानी पनडुब्बियों को रिटायर करने के बाद, 2025 तक अपनी पनडुब्बी ताकत को 65 तक बनाए रखने की योजना बना रहा है, और 2035 तक इसे बढ़ाकर 80 तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। चीन की नौसेना ने इन तकनीकी उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण में भारी निवेश किया है, और वह इसके लिए पानी की तरह से पैसे बहा रहा है।

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