इस उम्र में बंद होते हैं पीरियड्स? जानिए डॉक्टर से जरूरी बातें

हेल्थ डेस्क: मीनोपॉज एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है जो हर महिला के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होती है। यह वह समय होता है, जब महिलाओं का मासिक धर्म (पीरियड्स) स्थायी रूप से बंद हो जाता है। आमतौर पर यह 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह इससे पहले भी शुरू हो सकता है।

मीनोपॉज न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। इससे जुड़े लक्षण और इससे उत्पन्न होने वाली समस्याएं महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए सभी महिलाओं को इसकी जानकारी होनी चाहिए।

कब से होती हैं शुरुआत: 40 साल की उम्र में मेनोपॉज़ के शुरुआती लक्षण दिखने लगते हैं। 40 की उम्र के बाद महिलाओं को साल में कम से कम 1 बार रुटीन चेकअप के लिए गायनाकोलॉजिस्ट से मिलना चाहिए। ताकि किसी तरह की कोई परेशानी न हो।

मीनोपॉज के लक्षण

1 .हॉट फ्लैशेज (गर्मी के झोंके): यह मीनोपॉज का सबसे सामान्य लक्षण है, जिसमें शरीर में अचानक गर्मी का अहसास होता है और पसीना आ सकता है। यह अक्सर रात में होता है और नींद को बाधित करता है।

2 .नींद में खलल: हॉट फ्लैशेज के कारण कई महिलाएं रात में सही से सो नहीं पातीं, जिसके कारण वे थकी हुई महसूस करती हैं।

3 .मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन: हार्मोनल असंतुलन के कारण मीनोपॉज के दौरान महिलाओं के मूड में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं। उन्हें चिड़चिड़ापन, गुस्सा या उदासी महसूस हो सकता है।

4 .बेचैनी और चिंता: मीनोपॉज में महिलाओं को मानसिक असंतुलन का सामना भी हो सकता है, जैसे एंग्जाइटी, डिप्रेशन या स्ट्रेस।

5 .याददाश्त में कमी: कई महिलाओं को मीनोपॉज के दौरान याददाश्त में कमी का सामना भी हो सकता है, जिसे "ब्रेन फॉग" कहा जाता है।

6 .शारीरिक बदलाव: मीनोपॉज के दौरान महिलाओं को शरीर में कई शारीरिक बदलाव भी महसूस हो सकते हैं। इनमें से कुछ सामान्य बदलाव हैं - वेट गेन (वजन का बढ़ना), त्वचा का शुष्क होना, और जननांगों के आसपास शुष्कता या जलन का अहसास होना।

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