इस पहल का मुख्य उद्देश्य माताओं को स्वास्थ्य संस्थानों में स्वच्छ, निजी और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। स्तनपान के दौरान माताएं किसी प्रकार के संकोच या असुविधा का अनुभव नहीं करें, इसके लिए इन कार्नरों में आरामदायक कुर्सियां, पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन और पानी व हाथ धोने की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पहले से ही राज्य के मेडिकल कालेज, सदर और अनुमंडलीय अस्पतालों में ब्रेस्ट फीडिंग कार्नर बनाए जा चुके हैं। अब इस सुविधा को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तारित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म के पहले छह महीने में केवल स्तनपान शिशु के स्वास्थ्य और विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, कई माताएं अस्पतालों और सार्वजनिक स्थानों पर उपयुक्त सुविधा न होने के कारण स्तनपान करने में असहज महसूस करती हैं। नई पहल के जरिए माताओं को मनोवैज्ञानिक और भौतिक समर्थन मिलेगा, जिससे स्तनपान की अवधि और निरंतरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
यह योजना राष्ट्रीय पोषण मिशन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लक्ष्यों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य शिशुओं में कुपोषण कम करना, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना और माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी, बल्कि महिलाओं के प्रति संवेदनशील और सहयोगी स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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