दुनिया के 6 सबसे घातक लेजर हथियार, 1 भारत के पास!

नई दिल्ली।  युद्ध के मैदान अब पहले की तरह सिर्फ धमाकों और मिसाइलों तक सीमित नहीं रहे। तकनीक ने युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। आज लेजर हथियार दुश्मनों को सेकेंडों में नष्ट करने की क्षमता रखते हैं, वह भी बिना आवाज और बेहद कम लागत में। यह तकनीक दुनिया की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन गई है।

भविष्य की जंग और लेजर तकनीक

बीते दशक में ड्रोन, यूएवी, क्रूज मिसाइल और स्वार्म अटैक जैसी चुनौतियों ने पारंपरिक डिफेंस सिस्टम की सीमाओं को उजागर किया। इस चुनौती का जवाब बनकर उभरे हैं लेजर हथियार। ये बिजली की रफ्तार से लक्ष्य पर वार करते हैं और पारंपरिक गोला-बारूद की जरूरत लगभग खत्म कर देते हैं।

दुनिया के प्रमुख लेजर हथियार

1. इजरायल – आयरन बीम

इजरायल का आयरन बीम सिस्टम 100 किलोवाट शक्ति वाला लेजर हथियार है। यह रॉकेट, मोर्टार, तोप के गोले और छोटे हवाई खतरों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। आयरन डोम के साथ मिलकर यह इजरायल की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत बनाता है।

2. अमेरिका – HELIOS

अमेरिकी नौसेना के लिए विकसित HELIOS सिस्टम 60 किलोवाट से अधिक क्षमता वाला है और भविष्य में 120 किलोवाट तक अपग्रेड किया जा सकता है। युद्धपोतों पर तैनात यह ड्रोन, छोटी नावों और हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में सक्षम है।

3. ब्रिटेन – ड्रैगनफायर प्रोग्राम

ब्रिटेन का ड्रैगनफायर लेजर लगभग 50 किलोवाट की क्षमता वाला है। यह मुख्य रूप से हवाई खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है और इसकी फायरिंग की लागत बेहद कम है। 2027 तक इसे ब्रिटिश नेवी में शामिल करने की योजना है।

4. रूस – पेरेस्वेत

रूस का पेरेस्वेत लेजर हथियार मोबाइल है और हवाई सुरक्षा एवं सैटेलाइट रोधी भूमिका निभाने में सक्षम है। पहली बार 2018 में इसे राष्ट्रपति पुतिन ने सार्वजनिक किया था।

5. चीन – LY-1

चीन का LY-1 हाई पावर लेजर सिस्टम ड्रोन, हेलीकॉप्टर और क्रूज मिसाइल जैसे खतरों को रोकने के लिए सक्षम माना जाता है। इसकी आधिकारिक जानकारी सीमित है, लेकिन यह चीन की सैन्य ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

6. भारत – Mk-II(A) और DURGA

भारत ने भी लेजर हथियारों के क्षेत्र में कदम बढ़ाए हैं। Mk-II(A) 30 किलोवाट क्षमता वाला लेजर, 5 किलोमीटर तक ड्रोन और छोटे हवाई खतरों को नष्ट कर सकता है। जबकि DURGA परियोजना 300 किलोवाट हाई पावर लेजर विकसित किया जा रहा है, जिसकी रेंज करीब 20 किलोमीटर तक है। यह भारत को भविष्य के युद्ध के लिए तैयार कर रहा है।

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