बिहार में बड़ा ऐलान: जमीन विवाद निपटारे की नई व्यवस्था

पटना। बिहार सरकार ने भूमि विवादों के समाधान को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब जमीन से जुड़े झगड़ों का निपटारा पुलिस थानों में नहीं, बल्कि सीधे अंचल कार्यालयों के माध्यम से किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि भूमि विवादों को प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शी और प्रभावी तरीके से सुलझाया जाए, ताकि आम लोगों को बार-बार थानों और अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मुजफ्फरपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस नई व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब थाना स्तर पर आयोजित होने वाले जनता दरबार की व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह अंचल प्रशासन को सौंपी जा रही है।

पुलिस की भूमिका होगी सीमित

अब तक जमीन विवादों की सुनवाई थानों में होती थी, जहां अंचलाधिकारी और थानेदार संयुक्त रूप से मामलों को देखते थे। नई व्यवस्था के तहत भूमि विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई अंचल कार्यालयों में होगी। थानेदार जरूरत पड़ने पर सहयोग करेंगे, लेकिन मुख्य भूमिका अंचल प्रशासन की होगी। इन मामलों की निगरानी जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक द्वारा की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे भूमि विवादों में पुलिस हस्तक्षेप कम होगा और समस्याओं का समाधान प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत तेजी से किया जा सकेगा।

जनता से सीधे संवाद की पहल

सरकार ने राजस्व व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ‘भूमि सुधार जनकल्याण संवाद’ नाम से एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत अधिकारी और मंत्री सीधे जनता से संवाद करेंगे और जमीन से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को समझेंगे। डिप्टी सीएम ने कहा कि लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जो व्यक्ति नहीं, बल्कि सिस्टम पर आधारित हो और लंबे समय तक कारगर साबित हो।

अधिकारियों की छुट्टियां रद्द

भूमि विवादों के लंबित मामलों को जल्द निपटाने के लिए दिसंबर माह में सभी अंचलाधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। इसके साथ ही अंचल कार्यालयों को सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, सप्ताह में छह दिन आम जनता के लिए खोलने का निर्देश दिया गया है। कार्यालयों में नियमों और सेवाओं से जुड़ी जानकारी पोस्टर और बैनर के माध्यम से प्रदर्शित की जाएगी।

100 दिनों में दिखेगा बदलाव

डिप्टी सीएम ने कहा कि वे अपने कार्यकाल के पहले 100 दिनों में प्रमंडल और जिला स्तर पर जाकर जनता से संवाद करेंगे। इस दौरान भूमि विवाद, शिकायतों और विभागीय कामकाज से जुड़ी समस्याओं की पहचान कर मौके पर ही समाधान की दिशा तय की जाएगी। सरकार की कोशिश है कि भविष्य में नए विवाद उत्पन्न न हों।

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