जांच के आधार पर कार्रवाई
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित स्वयंसेवी संस्थाओं और एजेंसियों पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारियों को भी निर्देश भेजे गए हैं, ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरी हो सके। विभाग का मानना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल के निरीक्षणों और शिकायतों में यह बात सामने आई है कि कुछ स्थानों पर मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं की केंद्रीयकृत रसोई घर ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। कहीं साफ-सफाई में कमी पाई गई तो कहीं भोजन की गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति को लेकर सवाल उठे हैं। इसी कारण शिक्षा विभाग ने अचानक निरीक्षण यानी ऑन-स्पॉट जांच का निर्णय लिया है।
भोजन ढोने वाले वाहनों की भी जांच
जांच केवल रसोई घरों तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग यह भी देख रहा है कि रसोई से स्कूलों तक भोजन पहुंचाने वाले वाहनों की स्थिति कैसी है। भोजन की ढुलाई के दौरान स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसे भी जांच रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
इन इलाकों में लागू है केंद्रीयकृत रसोई व्यवस्था
राज्य के कई नगर निकाय क्षेत्रों में स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से केंद्रीयकृत रसोई से मिड-डे मील की आपूर्ति की जा रही है। हसनपुरा, खड़गपुर, जमालपुर, बरहिया, बाढ़, अरेराज, शेखपुरा, आंदर, लखीसराय, अरवल सदर, शेखोपुरसराय, केसरिया, ढाका, रक्सौल और मुंगेर जैसे क्षेत्रों में दिसंबर से चिन्हित स्कूलों में यह व्यवस्था लागू है। वर्तमान में नगर निकायों के करीब 552 सरकारी मध्य विद्यालयों में इसी प्रणाली के तहत बच्चों को भोजन दिया जा रहा है।

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