भारत, रूस, चीन की बड़ी तैयारी... टेंशन में ट्रंप, अमेरिका हैरान!

नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक बड़ा बदलाव धीरे-धीरे आकार ले रहा है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका यानी BRICS देशों का समूह अब अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। इसकी सबसे बड़ी झलक सोने की बढ़ती खरीद और उत्पादन में देखने को मिल रही है। यही वजह है कि यह रणनीति अमेरिका और उसके नेतृत्व वाली वित्तीय व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।

सोने के भंडार में BRICS देश

आज BRICS देशों के पास दुनिया के कुल आधिकारिक सोने के भंडार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। यदि इनके करीबी और सहयोगी देशों को भी जोड़ लिया जाए, तो यह आंकड़ा करीब 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। रूस और चीन इस मामले में सबसे आगे हैं। हाल के वर्षों में इन दोनों देशों ने न केवल बड़े पैमाने पर सोने का उत्पादन किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी जमकर खरीदारी की है। ब्राजील ने भी लंबे अंतराल के बाद दोबारा सोना खरीदना शुरू किया है, जो इस बदलती सोच को दर्शाता है।

क्यों घट रहा है डॉलर पर भरोसा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, BRICS देशों की यह रणनीति केवल निवेश का फैसला नहीं है, बल्कि यह वैश्विक वित्तीय जोखिमों से बचाव का तरीका भी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह पश्चिमी देशों ने रूस के विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज किया, उसने कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। इससे यह संदेश गया कि डॉलर या विदेशी बैंकों में रखे गए भंडार पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं और वे भू-राजनीतिक तनावों के शिकार हो सकते हैं।

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा

डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए BRICS देशों ने आपसी व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को भी तेज़ किया है। अब इनके बीच होने वाला एक बड़ा हिस्सा व्यापार सीधे डॉलर के बिना निपटाया जा रहा है। भारत-रूस और चीन-ब्राजील जैसे समझौते इसका उदाहरण हैं। इससे न केवल लेनदेन की लागत घटती है, बल्कि प्रतिबंधों के जोखिम से भी बचाव होता है।

क्या बदल जाएगी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था?

विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल डॉलर की जगह तुरंत कोई और रिज़र्व करेंसी ले ले, ऐसा नहीं है। अमेरिकी डॉलर अभी भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली की रीढ़ बना हुआ है। लेकिन BRICS देशों की बढ़ती आर्थिक ताकत जो वैश्विक व्यापार के करीब 30 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है, यह संकेत जरूर देती है कि भविष्य में व्यवस्था ज्यादा बहुध्रुवीय हो सकती है। जो अमेरिका के लिए हैरान करने वाली खराब है।

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