एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में रोबोट आर्मी तैयार करने के लिए अमेरिकी पर्ड्यू यूनिवर्सिटी को पांच साल के लिए 1.5 मिलियन डॉलर का फंडिंग मिला है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे रोबोट विकसित करना है, जो GPS के बिना भी काम कर सकें। यानी ये रोबोट खुद से नक्शा बना सकेंगे, खतरे का अंदाज़ा लगा सकेंगे और सैनिकों की मदद कर सकेंगे, खासकर उन इलाकों में जहां GPS सिग्नल उपलब्ध नहीं होता।
रोबोट की विशेषता
इस प्रोजेक्ट में बनाए जा रहे रोबोट सिर्फ मशीन नहीं होंगे। इन्हें इस तरह डिज़ाइन किया जाएगा कि वे इंसानों की तरह सोच सकें और निर्णय ले सकें। ड्रोन ऊपर से इलाके का निरीक्षण करेंगे और जमीन पर मौजूद रोबोट उस जानकारी का उपयोग मिशन पूरा करने में करेंगे। ये रोबोट खतरनाक इलाकों में जाकर जासूसी, स्काउटिंग और सामान की डिलीवरी जैसे कार्य कर सकेंगे।
इंसानों जैसी सोच और टीम वर्क
पर्ड्यू यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर अनिकेत बेरा इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका कहना है कि रोबोटों को इंसानों जैसी सोच और निर्णय क्षमता देने का लक्ष्य है। रोबोट एक-दूसरे से जानकारी साझा करेंगे, टीम के रूप में योजना बनाएंगे और मिशन को पूरा करेंगे। इस काम के लिए पर्ड्यू के हिक्स रोबोटिक्स एंड ऑटोनॉमी टेस्टबेड का इस्तेमाल किया जाएगा। भविष्य में इन रोबोटों में खुद से सीखने की क्षमता भी जोड़ी जाएगी, जिससे ये और ज्यादा भरोसेमंद साथी बनेंगे।
चीन की तैयारी, तैयार कर रहा रोबोट आर्मी
भारत के पड़ोसी चीन ने भी रोबोट सैनिकों की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। खबरें हैं कि चीन वियतनाम बॉर्डर पर रोबोट आर्मी तैनात करने वाला है और बड़े पैमाने पर सेना के लिए रोबोट निर्माण कर रहा है। खासकर AI आधारित रोबोट में चीन तेजी से प्रगति कर रहा हैं।

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