क्यों टल गए पंचायत चुनाव?
राज्य सरकार ने पंचायत व्यवस्था को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने के लिए पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का नए सिरे से परिसीमन कराने का फैसला लिया है। यह परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा ताकि बढ़ती आबादी के अनुसार सभी क्षेत्रों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
बताया जा रहा है कि कई दशकों से पंचायतों की सीमाओं में व्यापक बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार का मानना है कि नई आबादी के अनुरूप सीमाएं तय करना जरूरी है, ताकि भविष्य में पंचायतों का गठन अधिक संतुलित तरीके से हो सके।
कब शुरू होगी परिसीमन की प्रक्रिया?
जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2026 से परिसीमन का काम शुरू होने की संभावना है। यह प्रक्रिया अप्रैल 2027 तक चल सकती है। इसके बाद पिछड़े वर्गों के आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर गठित समर्पित आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। आयोग की सिफारिशों के आधार पर आरक्षण का अंतिम स्वरूप तय किया जाएगा और उसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की संभावना है। यानी परिसीमन, आरक्षण निर्धारण और अन्य प्रशासनिक तैयारियां पूरी होने के बाद ही राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा।
क्या चुनाव टलने से पंचायतों का काम प्रभावित होगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आगे बढ़ने का असर पंचायतों के विकास कार्यों पर नहीं पड़ेगा। वर्तमान मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य अगले कुछ महीनों तक अपने दायित्व निभाते रह सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाएं और प्रशासनिक कार्य लगातार जारी रहेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नई पंचायतों के गठन तक स्थानीय प्रशासन और जनसेवाओं में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।
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