अब आसान होगी पेंशन स्वीकृति प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत अब नो ड्यूज सर्टिफिकेट (अदेयता प्रमाण-पत्र) जारी कराने के लिए फाइल को शासन स्तर पर भेजने की आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरी प्रक्रिया संबंधित विभागाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष के स्तर पर ही पूरी कर ली जाएगी। इससे फाइलों के अनावश्यक आवागमन पर रोक लगेगी और पेंशन स्वीकृत करने में लगने वाला समय भी कम होगा।
देरी की समस्या होगी खत्म
सरकार के सामने यह बात आई थी कि कई मामलों में केवल नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कराने के लिए ही फाइल शासन को भेज दी जाती थी। इस कारण सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान समय पर नहीं हो पाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस प्रकार की प्रशासनिक देरी को काफी हद तक समाप्त करने की उम्मीद है।
विभागाध्यक्ष की होगी जिम्मेदारी
जारी निर्देशों के अनुसार अब नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी करने की पूरी जिम्मेदारी विभागाध्यक्ष या संबंधित कार्यालयाध्यक्ष की होगी। इस प्रक्रिया को विभाग के अंदर ही पूरा किया जाएगा और इसे पेंशन स्वीकृति में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा। इससे अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद अपने भुगतान के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
गंभीर मामलों में पुराने नियम लागू
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ ऐसी विभागीय जांच लंबित है, जिसमें सरकारी धन के गंभीर वित्तीय नुकसान का मामला शामिल हो, तो उसके सेवानिवृत्ति लाभों पर संबंधित नियम लागू होंगे। ऐसे मामलों में 28 जुलाई 1989 के शासनादेश के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और आवश्यक निर्णय उसी आधार पर लिया जाएगा।
कर्मचारियों को मिलेगा सीधा लाभ
इस फैसले से बेसिक शिक्षा विभाग के समूह 'क' और 'ख' के सेवानिवृत्त अधिकारियों को सबसे बड़ा लाभ समय पर पेंशन और अन्य वित्तीय देयकों के भुगतान के रूप में मिलेगा। साथ ही विभागीय स्तर पर प्रक्रिया पूरी होने से प्रशासनिक कामकाज भी अधिक पारदर्शी और तेज होगा। सरकार का यह कदम सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत देने के साथ-साथ पेंशन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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