घर बैठे मिलेगी रजिस्ट्रेशन की सुविधा
राज्य सरकार ने 'सबका सम्मान, जीवन आसान' पहल के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए घर-घर रजिस्ट्रेशन सेवा शुरू की है। पहले इस सुविधा का लाभ 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को दिया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब आयु सीमा घटाकर 75 वर्ष कर दी गई है। इससे बड़ी संख्या में बुजुर्ग नागरिकों को सीधे लाभ मिलेगा।
इस व्यवस्था के तहत यदि कोई पात्र बुजुर्ग जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री कराना चाहता है और कार्यालय तक पहुंचने में असमर्थ है, तो मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट निर्धारित समय पर उसके घर जाकर आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करेगी और पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी कराएगी। इसके लिए संबंधित विभाग ने टोल-फ्री सुविधा भी उपलब्ध कराई है, ताकि लोग आसानी से आवेदन कर सकें।
रजिस्ट्री से पहले जमीन की जानकारी
नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि जमीन खरीदने और बेचने वाले दोनों पक्षों को रजिस्ट्री से पहले संपत्ति की पूरी और अद्यतन कानूनी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे खरीदार यह जान सकेगा कि संबंधित जमीन पर किसी प्रकार का विवाद, बंधक या अन्य कानूनी अड़चन तो नहीं है।
इसके अलावा आधुनिक GIS तकनीक और जियो-टैगिंग की मदद से भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। संबंधित अंचलाधिकारी के स्तर पर प्री-वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी अनिवार्य होगी, जिससे गलत या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री की संभावना काफी कम हो जाएगी।
ऑनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया
सरकार जमीन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। आवेदन से लेकर दस्तावेजों के सत्यापन और रजिस्ट्रेशन तक अधिकांश प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और लोगों का समय भी बचेगा। डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी जमीन का रिकॉर्ड आसानी से देखा और सत्यापित किया जा सकेगा, जिससे भविष्य में कानूनी विवाद कम होने की उम्मीद है।
सामान्य रजिस्ट्री के नियमों में भी बदलाव
सिर्फ बुजुर्गों के लिए ही नहीं, बल्कि सामान्य जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब संबंधित अंचल के अंचलाधिकारी (सीओ) और राजस्व अधिकारियों को जमीन की जांच कर अधिकतम 10 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी और लोगों को समय पर सेवा मिल सकेगी।
फर्जीवाड़े और जमीन विवादों पर लगेगी रोक
बिहार में लंबे समय से जमीन से जुड़े विवाद बड़ी समस्या रहे हैं। कई मामलों में एक ही जमीन को अलग-अलग लोगों के नाम बेचने जैसी धोखाधड़ी सामने आती रही है, जिसके कारण खरीदार वर्षों तक अदालतों में न्याय के लिए भटकते हैं। नई व्यवस्था में रजिस्ट्री से पहले कानूनी स्थिति की जांच, डिजिटल रिकॉर्ड, प्री-वेरिफिकेशन और ऑनलाइन प्रक्रिया लागू होने से ऐसे मामलों पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है। इससे ईमानदार खरीदारों को सुरक्षा मिलेगी और जमीन खरीद-बिक्री का पूरा सिस्टम अधिक भरोसेमंद बन सकेगा।
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