दो योजनाओं के माध्यम से मिलेगा अनुदान
सरकार ने स्वदेशी नस्ल की गायों के संरक्षण और डेयरी व्यवसाय को प्रोत्साहन देने के लिए दो अलग-अलग योजनाएं लागू की हैं। पहली योजना मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना है, जिसके तहत 10 स्वदेशी गायों की डेयरी स्थापित करने पर परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इस यूनिट की अनुमानित लागत लगभग 23.60 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
वहीं दूसरी योजना मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना है। इसमें दो स्वदेशी गायों की छोटी डेयरी इकाई स्थापित करने पर 40 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। करीब दो लाख रुपये की लागत वाली इस इकाई पर पात्र लाभार्थी को अधिकतम 80 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
इन स्वदेशी नस्लों को मिलेगा प्राथमिकता
दोनों योजनाओं में देश की प्रमुख स्वदेशी नस्लों गीर, साहीवाल और थारपारकर को शामिल किया गया है। ये नस्लें अधिक दूध उत्पादन, बेहतर स्वास्थ्य और भारतीय जलवायु के अनुकूल होने के कारण डेयरी व्यवसाय के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं। सरकार का उद्देश्य इन नस्लों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण दूध उत्पादन को भी बढ़ावा देना है।
दूध उत्पादन में हैं आगे
गीर नस्ल की गाय प्रतिदिन लगभग 14 से 16 लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है। साहीवाल गाय भी औसतन 15 से 16 लीटर दूध देती है और लंबे समय तक दुग्ध उत्पादन बनाए रखती है। वहीं थारपारकर नस्ल करीब 12 से 14 लीटर प्रतिदिन दूध देती है तथा लगभग 300 दिनों तक दुग्ध उत्पादन करने के लिए जानी जाती है। इन नस्लों के दूध की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण पशुपालकों को बेहतर आय मिलने की संभावना रहती है। इसके अलावा उच्च गुणवत्ता वाली गायों की कीमत भी अच्छी मिलती है, जिससे डेयरी व्यवसाय लाभदायक साबित हो सकता है।
आवेदन प्रक्रिया शुरू
इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक किसान और पशुपालक विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा संबंधित जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से भी योजना की पात्रता, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

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