10 दिनों में मिलेगी भूमि की आधिकारिक जानकारी
नई व्यवस्था के तहत यदि कोई खरीदार जमीन की स्थिति जानने के लिए आवेदन करता है, तो संबंधित अंचलाधिकारी (सीओ) या राजस्व अधिकारी को 10 दिनों के भीतर उस जमीन की अद्यतन रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध करानी होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर खरीदार यह जान सकेगा कि संबंधित भूमि पर किसी प्रकार का विवाद, स्वामित्व संबंधी समस्या या अन्य कानूनी अड़चन तो नहीं है। इससे जमीन खरीदने का निर्णय पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो जाएगा।
एक ही जमीन की दोबारा बिक्री पर रोक
राज्य में कई बार ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें एक ही जमीन अलग-अलग लोगों को बेच दी जाती है। ऐसे मामलों में खरीदारों को आर्थिक नुकसान के साथ वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नई प्रणाली के लागू होने के बाद जमीन की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि पहले ही हो जाएगी। इससे फर्जी बिक्री और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है और खरीदार अधिक भरोसे के साथ निवेश कर सकेंगे।
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी आसान
नई व्यवस्था का एक बड़ा लाभ यह भी होगा कि यदि खरीदी गई जमीन विवादमुक्त होगी, तो दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की प्रक्रिया भी पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो सकेगी। भूमि रिकॉर्ड स्पष्ट होने के कारण नामांतरण में आने वाली कई सामान्य समस्याओं से राहत मिलने की संभावना है। इससे खरीदारों को रजिस्ट्री के बाद भी अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आवेदन प्राप्त होने के बाद तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए अंचल स्तर के अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों को आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया गया है तथा ऑनलाइन प्रणाली के संचालन के लिए उनकी डिजिटल आईडी सक्रिय कर दी गई हैं।
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
बिहार में पहले से ही जमीन की रजिस्ट्री ई-निबंधन प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। अब इसी डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत करते हुए भूमि की अद्यतन रिपोर्ट भी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और निर्धारित समय के भीतर आवश्यक जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
.png)
0 comments:
Post a Comment