सिंचाई के लिए मिलेगी नियमित बिजली
सरकार का उद्देश्य यह है कि किसानों को सिंचाई के समय बिजली कटौती की समस्या का सामना न करना पड़े। लगातार 12 घंटे बिजली मिलने से किसान अपनी जरूरत के अनुसार खेतों में पटवन कर सकेंगे। विशेष रूप से धान, मक्का, दलहन और सब्जी जैसी फसलों की खेती करने वाले किसानों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। कम बारिश वाले क्षेत्रों में यह फैसला खेती को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि समय पर सिंचाई होने से फसलों के नुकसान की आशंका कम होगी।
सिर्फ 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली
बिहार सरकार पहले से ही कृषि उपभोक्ताओं को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध करा रही है। किसानों को कृषि कनेक्शन पर करीब 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। सरकार का कहना है कि इस पर लगभग 93 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। कम दर पर बिजली मिलने से किसानों का सिंचाई खर्च घटेगा और डीजल पंप पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी कम होगा। इससे खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
2,700 से अधिक एग्रीकल्चर फीडरों से होगी आपूर्ति
राज्य में कृषि क्षेत्र के लिए 2,700 से ज्यादा एग्रीकल्चर फीडर स्थापित किए जा चुके हैं। इन फीडरों के माध्यम से सिंचाई के लिए अलग बिजली आपूर्ति की व्यवस्था की गई है, जिससे घरेलू बिजली आपूर्ति प्रभावित हुए बिना किसानों को नियमित बिजली मिल सके। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के अधिक से अधिक खेतों तक समय पर बिजली पहुंचे और किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा मिल सके।
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