यूपी में 'ग्राम प्रधानों' के लिए बड़ा अपडेट, पढ़ें पूरी डिटेल्स

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के प्रशासन को लेकर चल रहे एक महत्वपूर्ण मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। यह मामला उन ग्राम प्रधानों से जुड़ा है जिन्हें ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अदालत ने इस व्यवस्था के कानूनी आधार और संवैधानिक पहलुओं पर सरकार से विस्तृत पक्ष रखने को कहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी जानना चाहा कि पंचायत चुनाव कराने की दिशा में आवश्यक प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट की वर्तमान स्थिति पर भी सरकार से जानकारी मांगी गई है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को निर्धारित की गई है।

किस प्रावधान पर उठे सवाल?

जनहित याचिका में उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1947 की धारा 12(3-क) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस प्रावधान के आधार पर सरकार ने ग्राम पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया, जिससे वे पंचायतों का कामकाज संभालते रहे। याचिका में दलील दी गई है कि यह व्यवस्था संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है और पंचायतों के लोकतांत्रिक ढांचे पर भी सवाल खड़े करती है।

शासनादेश रद्द करने की भी मांग

याचिकाकर्ता ने अदालत से उस सरकारी आदेश को भी निरस्त करने की मांग की है, जिसके तहत प्रदेशभर में कार्यकाल समाप्त होने के बाद पूर्व ग्राम प्रधानों को प्रशासक का दायित्व दिया गया था। उनका तर्क है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद नई व्यवस्था लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप लागू होनी चाहिए।

पुराने फैसले का भी दिया हवाला

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले का उल्लेख किया गया। दलील दी गई कि वर्ष 2000 में इसी तरह के एक प्रावधान को अदालत पहले भी असंवैधानिक मान चुकी है। बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, लेकिन वहां संवैधानिक वैधता का अंतिम निर्णय देने के बजाय इस प्रश्न को दोबारा हाईकोर्ट के विचार के लिए खुला छोड़ दिया गया था।

सरकार ने रखा अपना पक्ष

राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि इस विषय पर निर्णय लेने का अधिकार वर्तमान पीठ के पास है और मामले को किसी बड़ी पीठ के पास भेजने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने संकेत दिया कि वह अपने पक्ष में विस्तृत जवाब अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

अगली सुनवाई पर नजर

अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। अदालत में सरकार का जवाब आने के बाद यह तय होगा कि संबंधित प्रावधान और उसके आधार पर जारी प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर आगे क्या दिशा तय होती है। इस फैसले का असर प्रदेश की ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य में होने वाले पंचायत चुनावों की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।

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