निजी वाहन चालकों पर भी लागू होगा नियम
अब तक प्रशिक्षण की अनिवार्यता मुख्य रूप से व्यावसायिक वाहनों के लिए थी, लेकिन प्रस्तावित बदलाव के बाद यह नियम निजी दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों पर भी लागू होगा। यानी बाइक, स्कूटर या कार का लाइसेंस बनवाने के इच्छुक लोगों को भी पहले अधिकृत ड्राइविंग स्कूल से प्रशिक्षण लेना होगा।
आवेदन से पहले पूरी करनी होगी ट्रेनिंग
नई व्यवस्था के अनुसार, लाइसेंस के लिए आवेदन करने से पहले आवेदकों को परिवहन विभाग से मान्यता प्राप्त सरकारी या निजी ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण लेना होगा। निजी दोपहिया और चारपहिया वाहन के लिए 21 दिन का प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। कमर्शियल और भारी वाहनों के लिए 30 दिन का प्रशिक्षण पहले की तरह जारी रहेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मिलने वाला प्रमाणपत्र लाइसेंस आवेदन के साथ जमा करना होगा।
सड़क सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
सरकार का उद्देश्य केवल लाइसेंस जारी करना नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और जिम्मेदार चालक तैयार करना है। प्रशिक्षण के दौरान आवेदकों को ट्रैफिक नियम, सड़क संकेत, सुरक्षित ड्राइविंग तकनीक, आपातकालीन परिस्थितियों में वाहन संचालन और दुर्घटना से बचाव जैसे विषयों की जानकारी दी जाएगी।
सभी जिलों में लागू करने की तैयारी
परिवहन विभाग इस नई व्यवस्था को पूरे बिहार में एक समान लागू करने की तैयारी कर रहा है। जिला परिवहन कार्यालयों में भी इसके लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। प्रस्तावित योजना के अनुसार, नई प्रणाली लागू होने के बाद राज्य के सभी जिलों में लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया इसी नियम के तहत संचालित की जाएगी।
मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव होगा?
फिलहाल लर्निंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन परीक्षा और स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए निर्धारित ट्रैक पर ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था जारी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन प्रक्रियाओं के साथ प्रशिक्षण प्रमाणपत्र भी अनिवार्य दस्तावेज के रूप में शामिल हो जाएगा।

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