पुराने नियमों से मिल सकती है राहत
पहले मूल कार्डधारक की मृत्यु के बाद, जब उनके जीवनसाथी को पारिवारिक पेंशन मिलने लगती थी, तब CGHS कार्ड में नए आश्रित सदस्य को जोड़ने या दोबारा शामिल करने में नियमों की बाधा आती थी। इससे उन बेटियों के लिए इलाज की सुविधा प्रभावित हो सकती थी, जो आर्थिक रूप से अपने माता-पिता पर निर्भर थीं। नए फैसले से ऐसे परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है।
किन बेटियों को मिलेगा लाभ?
इस सुविधा का लाभ लेने के लिए बेटी का विधवा या कानूनी रूप से तलाकशुदा होना जरूरी होगा। साथ ही, उसकी अपनी स्वतंत्र आय नहीं होनी चाहिए और वह पेंशनभोगी पर निर्भर होनी चाहिए। इसके अलावा, CGHS के तहत लागू अन्य पात्रता शर्तों को भी पूरा करना होगा। कार्ड में नाम जोड़ने से पहले संबंधित दस्तावेजों और पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।
सरकार के इस कदम से उन पेंशनभोगी परिवारों को मदद मिल सकती है, जो अपनी आश्रित बेटियों के इलाज के खर्च को लेकर चिंतित रहते हैं। पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के लिए संबंधित CGHS कार्यालय से आधिकारिक जानकारी लेना उचित रहेगा।

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