केवल गांव में मकान या जमीन होना काफी नहीं
नई व्यवस्था के अनुसार, मतदाता को संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र में छह महीने तक रहने के साथ वहां निवास करने की मंशा भी दिखानी होगी। केवल गांव में जमीन, मकान या रिश्तेदारी होने से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का दावा स्वीकार नहीं होगा। सामान्य निवास की जांच उपलब्ध दस्तावेजों और निर्धारित मानकों के आधार पर की जाएगी।
इन दस्तावेजों से साबित करना होगा निवास
निवास प्रमाण के तौर पर आधार कार्ड, बिजली बिल, टेलीफोन बिल या अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सकते हैं। संबंधित अधिकारी इनकी जांच के बाद तय करेंगे कि आवेदक वास्तव में उस ग्राम पंचायत का सामान्य निवासी है या नहीं।
दो गांवों की वोटर लिस्ट में नहीं रहेगा नाम
अगर कोई व्यक्ति अपना निवास बदलकर दूसरे गांव में छह महीने से रह रहा है और वहां मतदाता बनना चाहता है, तो उसे पुराने गांव की मतदाता सूची से अपना नाम हटवाना होगा। इसका मकसद एक ही व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग ग्राम पंचायतों की मतदाता सूचियों में दर्ज होने से रोकना है।
पंचायत चुनाव पर क्या होगा असर?
इस नियम से मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों को सामान्य निवास तय करने का स्पष्ट आधार मिलेगा। अब नाम जोड़ने के लिए छह महीने के निवास, वहां रहने की मंशा और संबंधित दस्तावेजों की जांच अहम होगी। इससे पंचायत चुनाव के दौरान मतदाता सूची को लेकर होने वाले विवाद कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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